चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर अब अमेरिका की निगाहें तिरछी हो रही हैं। इंटरनेशनल लेवल पर इस मुद्दे ने दोनों ही देशों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। चीन और पाकिस्तान अवैध तरीके से अधिकृति बलूचिस्तान के प्राकृति स्रोतों का दोहन कर रहे हैं। साथ ही बलूचिस्तान में लोगों को खुलेआम नरंसहार भी कर रहे हैं।

भारत, अफगानिस्तान और बलूचिस्तान के प्रतिनिधि पाकिस्तान को इसम मुद्दे पर यूएन में बेनकाब कर चुके हैं। वहीं अब अमेरिका भी CPEC को लेकर पाकिस्तान पर सवाल उठा रहा है। CPEC 50 अरब डॉलर की परियोजना है जो पाकिस्तान के ग्वादर को चीन के काश्गर तक एक गलियारे के जरिए जोड़ती है।
अब पाकिस्तान के गृहमंत्री अहसान इकबाल ने कहा है कि, अमेरिका से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को भारत के नजरिये से नहीं, बल्कि इसे दक्षिण एशिया में शांति व स्थिरता लाने की आर्थिक योजना के तौर पर देखने का आग्रह किया है। डॉन न्यूज की खबर के अनुसार, इकबाल ने बुधवार को अमेरिका से पाकिस्तान को दूसरे देश के साथ जोड़कर देखने के बदले उसकी अपनी प्रतिभा के साथ देखने का आग्रह किया।
उन्होंने वाशिंगटन में जोंस होपकिंस स्कूल ऑफ एडवांस इंटरनेशनल स्टडीज में अपने संबोधन में कहा, "चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा किसी के विरुद्ध षड्यंत्र नहीं है। यह सुरक्षा योजना नहीं है। यह आर्थिक समृद्धि की योजना है, जिससे ऊर्जा, आधारभूत संरचना और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा।"
इकबाल ने कहा कि 50 अरब डॉलर की लागत वाली सीपीईसी परियोजना पर अमेरिका की चिंता निराधार है। उन्होंने कहा कि इससे सभी को फायदा होगा और यह दक्षिण एवं मध्य एशिया, मध्य-पूर्व व अफ्रिकी देशों को एकसाथ लाने के लिए मंच प्रदान करेगा।
इकबाल ने कहा, "इसलिए मुझे लगता है कि अमेरिका को सीपीईसी को भारतीय परिदृश्य से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि स्थापित करने के नजरिये से देखना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक स्वतंत्र देश है। हमारी अपनी पहचान है और चाहते हैं कि दूसरे देश भी इसका सम्मान करे।
इकबाल ने कहा, "अगर अमेरिका इस क्षेत्र को भारत के नजरिये से देखेगा तो यह क्षेत्र और अमेरिका के लिए नुकसानदायक होगा। यह बहुत जरूरी है कि अमेरिका इस स्थिति को स्वतंत्र नजरिये से देखे न कि किसी और तरीके से।"
ट्रंप प्रशासन ने पिछले सप्ताह सीपीईसी पर भारत के रुख का समर्थन करते हुए कहा था कि यह एक विविदास्पद भूभाग से होकर गुजरता है और किसी भी देश को बेल्ट व रोड पहल में दबाव की स्थिति पैदान नहीं करनी चाहिए। भारत ने इस वर्ष मई में हुए बेल्ट एवं रोड फोरम (बीआरएफ) सम्मेलन में इस परियोजना के पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरने की वजह से भाग नहीं लिया था।
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