अगले महीने से बिल्डरों के बुरे दिन शुरु हो सकते हैं। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने खुद इस बात के संकेत दिए हैं। वित्तमंत्री अरुण जेटली इस वक्त अमेरिका के दौरे पर हैं और वहां पर उन्होंने हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय में एक व्याख्यान के दौरान भारत में उभरते रियलस्टेट सेक्टर को जीएसटी में लाने के संकेत दिए हैं।

अगले महीने होगा फैसला
वित्तमंत्री ने अपन वक्तव्य में कहा कि अगले महीने 9 नंबर को गुवाहाटी में जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक है। वहां बहुत संभावना है कि रियलस्टेट को जीएसटी के अंतरगत लाया जाए। वित्तमंत्री जेटली ने कहा कि, रियल स्टेट एक ऐसा सेक्टर है जहां सबसे ज्यादा कालाधन और कर चोरी होती है।
क्यों जरूरी है?
वित्तमंत्री ने कहा कि रियल स्टेट को जीएसटी के दायरे में लाना जरूरी है। उन्होंने ये भी कहा कि देश के कुछ राज्य भी रियल स्टेट को जीएसटी के अंतरगत लाना चाहते हैं और वह इस पर जीएसटी परिषद के साथ विचार कर सकते हैं।
ग्राहकों को मिलेगा लाभ
जेटली के मुताबिक इससे ग्राहको को लाभ मिलेगा, उपभोक्ताओं को पूरे उत्पाद पर सिर्फ अंतिम टैक्स यानि कि जीएसटी देना होगा। जीएसटी में ये आखिरी कर भी ग्राहकों के लिए नगण्य साबित होगा, वित्तमंत्री ने ऐसी उम्मीद जताई।
वित्तमंत्री की मुख्य बातें
- रियल स्टेट पर 12 फीसदी तक लग सकता है जीएसटी।
- भूमि एवं अन्य अचल संपत्तियों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।
- जीएसटी टैक्स की प्रक्रिया में एक बुनियादी सुधार है।
- भारतीयों में टैक्स देने की आदत नहीं है।
- जीएसटी के तात्कालिक प्रभाव नहीं बल्कि दीर्घकालिक प्रभाव दिखेंगे।
- पिछले कई दशकों में कर आधार को बढ़ाने के गंभीर और वास्तविक प्रयास नहीं किये गये।


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