भारत में पूर्व आरबीआई गवर्नर रह चुके रघुराम राजन को इस वर्ष का अर्थ शास्त्र का नोबेल मिल सकता है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि रघुराम राजन को अर्थशास्त्र का नोबेल मिल सकता है। सोमवार यानि कि 9 अक्टूबर 2017 को नोबेल पुरस्कारों की घोषणा होनी है और संभावितों की लिस्ट में रघुराम राजन का भी नाम है।
राजन उन अर्थशास्त्रियों में से एक
नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक, क्लैरिवेट ऐनालिटिक्स अकैडमिक और साइंटिफिक रिसर्च की कंपनी है। वह अपने रिसर्च के आधार पर नोबेल पुरस्कार के संभावित विजेताओं की लिस्ट भी तैयार करती है। वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक राजन उन 6 अर्थशास्त्रियों में से एक हैं जिन्हें क्लैरिवेट ऐनालिटिक्स ने इस साल अपनी लिस्ट में शामिल किया है। कॉर्पोरेट फाइनैंस के क्षेत्र में किए गए काम के लिए राजन का नाम लिस्ट में आया है।
IMF के चीफ बने
रघुराम राजन अंतराष्ट्रीय इकोनॉमी की दुनिया का बड़ा नाम हैं। 40 साल की कम उम्र में ही वह IMF के चीफ बनें। राजन ने 2005 में एक पेपर प्रेजेंटेशन के बाद बड़ी प्रसिद्धि हासिल की। राजन ने अमेरिका में अर्थशास्त्री और बैंकरों की प्रतिष्ठित वार्षिक सभा में इस पेपर को प्रेजेंट किया था। तब राजन ने आर्थिक मंदी का अनुमान जताया था जिसका उस समय मजाक उड़ाया गया।
भविष्यवाणी सही साबित हुई
राघुराम राजन की भविष्यवाणी सही साबित हुई और तीन साल बाद दुनिया भर में आर्थिक मंदी छा गई। इस मंदी से सिर्फ दो ही देश बच पाए जिसमें एक भारत और दूसरा चीन है। दोनों देशों में इस मंदी का बहुत कम असर हुआ।
राजन की दलील
नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक, रघुराम राजन ने अपने पेपर में यह तर्क दिया था कि फाइनैंशल मार्केट विकसित होकर अधिक जटिल और कम सुरक्षित हो गए हैं। उन्होंने कहा था कि डेरिवेटिव्स जैसे क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप्स रिस्की हैं। तीन साल बादल 2008 में क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप्स की वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था गिर गई।


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