जीएसटी के अंतर्गत वस्तुओं के दामों में कटौती को लेकर सरकार ने शुक्रवार रात राहत की खबर दी। जीएसटी काउंसिल के तहत हुई बैठक में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने करोबारियों, निर्यातकों और छोटे कारोबारियों की चिंता को भांपते हुए उन्हें दिवाली का तोहफा जीएसटी टैक्स को कम करके दिया। यहां पर आपको बताएंगे कि किन चीजों पर जीएसटी टैक्स कम हुआ और किन वस्तुओं के दाम कम हुए।
फूड आइटम
रोटी, खाखरा, अनब्रैंडेड नमकीन और सूखा आम को 12 फीसदी टैक्स स्लैब के दायरे से हटा दिया गया है। अब इन पर 5 फीसदी टैक्स लगेगा।
बच्चों के सामान
चाइल्ड पैक्ड फूड और स्टेशनरी के सामानों पर भी अब कम टैक्स लगेगा। अभी तक इन पर 12 फीसदी टैक्स वसूला जा रहा था, जिसे घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।
कपड़ों के दाम होंगे कम
आने वाले दिनों में कपड़े भी सस्ते होंगे। कपड़ा बनाने के लिए उपयोग होने वाले मानव निर्मित धागे पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है। सिन्थेटिक फिलामेंट यार्न पर भी टैक्स में इतनी ही कमी की गई है।
ज्वेलरी और जरी का काम
जरी के काम और आर्टिफिशियल ज्वेलरी पर जीएसटी 12 से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है।
दवाओं के दाम भी होंगे कम
आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवाएं सस्ती होंगी। इन पर 12 फीसदी की बजाय 5 फीसदी टैक्स वसूलने का फैसला किया गया है।
घर बनाना होगा आसान
संगमरमर और ग्रेनाइट को छोड़कर फर्श के बाकी पत्थर पर टैक्स को घटाकर 18 प्रतिशत की श्रेणी में रखा गया है।
कचरे पर भी टैक्स होगा कम
ई-कचरा, प्लास्टिक और रबर कचरा पर टैक्स घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।
किसानों के लिए कुछ राहत
डीजल इंजन पुर्जों पर जीएसटी 28 से 18 फीसदी कर दी गई है। पंप के पुर्जों के दाम भी सस्ते हो सकते हैं।
छोटे कारोबारियों को हर महीने टैक्स नहीं करना होगा फाइल
जीएसटी काउंसिल ने छोटे और मझोले उद्यमों को टैक्स भुगतान और रिटर्न दाखिल करने के मामले में बड़ी रहात दी है। सालाना 1.5 करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली कंपनियों को हर महीने के बजाय अब तिमाही रिटर्न भरनी होगी। डेढ़ करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली कंपनियां जीएसटी में पंजीकृत कुल टैक्सपेयर्स आधार का 90 प्रतिशत है, लेकिन इनसे कुल कर का 5 से 6 प्रतिशत टैक्स ही प्राप्त होता है।
कंपोजिशन का दायरा बढ़ा
जीएसटी काउंसिल ने कंपोजिशन योजना अपनाने वाली कंपनियों के लिए भी कारोबार की सीमा 75 लाख रुपए से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए कर दी है। इस योजना के तहत एसएमई को कड़ी औपचारिकताओं से नहीं गुजरना पड़ता है और उन्हें 1 से 5 प्रतिशत के दायरे में टैक्स भुगतान की सुविधा दी गई है।
निर्यातकों को राहत
वैश्विक नरमी के कारण परेशान निर्यातकों को जुलाई और अगस्त के दौरान किए गए टैक्स भुगतान की वापसी 18 अक्टूबर तक हो जाएगी। चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में वे नाम मात्र 0.1 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान कर छूट वाली श्रेणी में काम करेंगे। एक अप्रैल से निर्यातकों को नकदी उपलब्ध कराने के लिए ई-वॉलेट सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
रेस्त्रां कारोबार के लिए मंत्री समूह
जीएसटी परिषद ने रेस्त्रां के लिए जीएसटी दर को युक्तिसंगत बनाने के साथ एक राज्य से दूसरे राज्य में बिक्री करने वालों को कंपोजिशन योजना के दायरे में लाने के लिए विचार को लेकर मंत्री समूह का भी गठन किया है।
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