नोटबंदी और जीएसटी के बाद से दुनिया भर की तमाम रेटिंग एजेंसियों ने भारत की विकास दर को लेकर तरह-तरह के आंकड़े पेश किए। अब एशियन डेवलपमेंट बैंक ने भी भारत की विकास दर को लेकर आंकड़े पेश किए हैं। चालू वित्त वर्ष के लिए एशियन डिवेलपमेंट बैंक (एडीबी) ने भारत की विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
पहले का आंकड़ा
हालांकि इससे पहले पहले एडीबी ने इसके 7.4 प्रतिशत होने का अनुमान जताया था। अगले वित्त वर्ष के लिए भी अनुमानित वृद्धि दर का आंकड़ा घटाया गया है। एशियन डिवेलपमेंट बैंक ने अपनी एशियाई विकास परिदृश्य -2017 की रिपोर्ट में कहा, 'वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर घटकर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह अप्रैल के अनुमान से 0.4 प्रतिशत कम है।
2018-19 में GDP की दर 7.4 फीसदी
वित्त वर्ष 2018-19 के लिए यह अनुमानित आंकड़ा 7.6 प्रतिशत से घटाकर 7.4 प्रतिशत किया गया है।' एडीबी ने कहा, 'हालांकि नोटबंदी और जीएसटी लागू करने से भारत में उपभोक्ता व्यय और कारोबारी निवेश पर असर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद भारत की स्थिति मजबूत बनी रहेगी।' रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दिक्कत काफी छोटे समय तक बनी रहेगी और उम्मीद की जाती है कि मध्यम अवधि में इन पहलों से वृद्धि लाभांश अर्जित होगा।
एशियाई देश करेंगे विकास
एडीबी की नई रिपोर्ट में विकासशील एशिया में वृद्धि की आशा को बरकरार रखा गया है जो कि वैश्विक व्यापार में सुधार, बड़ी औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में तेज विस्तार और चीन की संभावनाओं के बेहतर होने का परिणाम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सभी बातें मिलकर पुराने अनुमानों से आगे जाकर 2017 और 2018 में विकासशील एशिया में वृद्धि को आगे बढ़ाएंगे।
पटरी पर लौटा वैश्विक व्यापार
बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयुकी सवाडा के अनुसार विकासशील एशिया के लिए वृद्धि परिदृश्य अच्छा दिख रहा है। इसका मुख्य कारण वैश्विक व्यापार का पटरी पर लौटना एवं चीन में फिर मजबूती दिखना है। उन्होंने कहा,'विकासशील एशियाई देशों को उत्पादकता बढ़ाने वाले सुधारों को लागू करने के लिए इन शॉर्ट टर्म के आर्थिक परिदृश्यों का लाभ उठाना चाहिए। सबसे ज्यादा जरूरत वाले बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश करना चाहिए और लॉन्ग टर्म में वृद्धि क्षमताओं को बढ़ाने में मदद के लिए वृहद आर्थिक प्रबंधन करना चाहिए।'


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