केंद्र सरकार के कर्मचारी जो कि 7वें वेतन आयोग के तहत लंबे समय से बढ़े हुए वेतन का इंतजार कर रहे हैं, आखिरकार उन्हें अब बढ़ा हुआ वेतन मिलना शुरु हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी यह साफ नहीं किया है कि कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18000 से बढ़ाकर 21000 किया जाएगा या नहीं और क्या उन्हें इतना ही एरियर दिया जाएगा।
1 जनवरी 2018 से ही लागू होगा बढ़ा हुआ वेतन
जून माह में केंद्र सरकार ने न्यूनतम वेतन 18000 रुपए निधार्रित किया था, लेकिन जिस तरह से 2.57 मल्टिप्लायर सिस्टम लाया गया उसके हिसाब से यह कहा गया कि न्यूनतम वेतन बढ़ाने के लिए इसे 3 गुना करना होगा। वित्त मंत्रालय का कहना है कि वह वेतन में बढ़ोत्तरी करने के इच्छुक हैं। लेकिन एरियर्स का भुगतान नहीं किया जाएगा। बढ़ा हुआ वेतन 1 जनवरी 2018 से ही लागू होगा और यह मुद्दा केंद्रीय कैबिनेट के सामने जनवरी माह में लाया जाएगा।
बढ़ाना होगा मल्टीप्लायर
केंद्र सरकार की ओर से यह फैसला तब लिया गया जब इस बात को महसूस किया गया कि न्यूनतम सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पर्याप्त नहीं है। हालांकि केंद्र सरकार के कर्मचारी न्यूनतम वेतन को 26000 रुपए किए जाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में अगर ऐसा किया जाना है तो मल्टिप्यार को बढ़ाकर 3.68 करना होगा।
तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है एचआरए
X, Y और Z श्रेणी के शहरों के लिए एचआरए क्रमश: 24%, 16% और 8% रहेगा। लेकिन तीनों श्रेणियों के लिए यह क्रमश: 5400, 3600 और 1800 से कम नहीं रहेगा। यह रकम 18 हजार रुपए के न्यूनतम वेतन के 30%, 20% और 10% के हिसाब से कैल्कुलेट की गई है। इस फैसले से करीब साढ़े 7 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा। सातवें वेतन आयोन ने सिफारिश की थी कि डीए की दर 50% और 100% तक पहुंचने पर एचआरए की दों रिवाइज की जाएं। लेकिन सरकार ने डीए और 25% और 50% होने पर दरें बदलने का फैसला किया है।
इस तरह कैल्कुलेट कर सकते हैं HRA
कर्मचारियों को बेसिक पर उनके शहर की श्रेणी के अनुसार एचआरए दिया जाएगा। उदाहरण के लिए यदि आपका बेसिक पे 20000 रुपए है और आप दिल्ली में रहते हैं तो आपको 4800 रुपए एचआरए के रुप में मिलेंगे। यह डीए और अन्य भत्तों के साथ आपकी बेसिक सैलरी में जुड़कर मिलेगी।
47 लाख केंद्रीय कर्मचारियों का होगा फायदा
एक्स कैटेगरी में 8 शहर दिल्ली, मुंबई, पुणे, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद और बैंगलुरु हैं। जिनकी आबादी 50 लाख से ज्यादा है। वाई श्रेणी में 5 लाख से 50 लाख जनसंख्या वाले शहर, जबकि जेड कैटेगरी में 5 लाख से कम आबादी वाले देश के अन्य सभी शहर शामिल होंगे। महाराष्ट्र के नागपुर, औरंगाबाद, अकोला और मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर वाई श्रेणी में आते हैं। जबकि उज्जैन, सागर, रतलाम, खंडवा समेत अन्य बड़े शहर जेड श्रेणी में हैं।


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