जेपी इन्फ्राटेक को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के फैसले पर IDBI बैंक की पुनर्विचार की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। आईडीबीआई बैंक ने सुप्रीम कोर्ट से अपने आदेश पर दोबारा विचार करने की मांग की है। शीर्ष अदालत ने बैंक की इस याचिका पर 11 सितंबर को सुनवाई का फैसला लिया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, अमिताव रॉय और ए.एम खानविल्कर की बेंच ने ने बैंक की ओर से पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की मांग को स्वीकर कर लिया।
एक बार फिर जुपी ग्रुप इंफ्राटेक का इंचार्ज हो गया है
बैंक की ओर से अदालत में पेश हुए ए.एम सिंघवी ने कहा कि शीर्ष अदालत के सोमवार के आदेश के बाद जेपी ग्रुप एक बार फिर से इन्फ्राटेक का इंचार्ज हो गया है। सिंघवी ने कहा कि बैंक का पैसा भी जनता का ही पैसा है और हम कोर्ट के आदेश में बदलाव की मांग कर रहे हैं। वहीं, जेपी इन्फ्राटेक के प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने वाले लोगों की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अजित सिन्हा ने बैंक की मांग का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ग्राहकों को राहत मिली है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
बता दें कि सोमवार को जेपी समूह की बिल्डर कंपनी जेपी इन्फ्रा को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इससे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के करीब 32,000 फ्लैट खरीददारों को राहत मिली है, जिन्होंने कंपनी की परियोजनाओं में निवेश किया था। ट्रिब्यूनल की इलाहाबाद बेंच की ओर से 10 अगस्त को ही कंपनी को दिवालिया श्रेणी में डालने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद उन ग्राहकों की चिंताएं बढ़ गई थीं, जिन्होंने निर्माणाधीन फ्लैटों में निवेश किया है और अब तक पजेशन का इंतजार कर रहे हैं।
10 अगस्त को स्वीकार हुई थी IDBI की याचिका
जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया घोषित करने के लिये आईडीबीआई बैंक की याचिका कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने 10 अगस्त को विचारार्थ स्वीकार कर ली थी। कंपनी ने इस बैंक के 526 करोड रुपए का कर्ज की अदायगी नहीं की है। जेपी इंफ्राटेक सडक निर्माण और रियल इस्टेट के कारोबार में है और उसने दिल्ली को आगरा से जोडने वाले यमुना एक्सप्रेसवे का भी निर्माण किया है।


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