पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने नोटबंदी को लेकर बड़ा और गंभीर बयान दिया है। पूर्व RBI गवर्नर ने कहा कि उनके कार्यकाल में कभी भी नोटबंदी पर फैसला लेने के लिए नहीं कहा गया था। आपको बता दें कि रघुराम राजन का कार्यकाल 5 सितंबर को पूरा हो चुका था और नोटबंदी की घोषणा 8 नंवबर 2016 को गई थी।
नोटबंदी की घोषणा
8 नंवबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बंद करने का ऐलान किया था। इसी सप्ताह आरबीआई की ओर से जारी आंकड़ों में कहा गया है कि पुराने बंद किए गए 500 और 1000 रुपये के 99 प्रतिशत नोट बैंकों में जमा हो गए।
रघुराम राजन की राय
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए साक्षात्कार में रघुराम राजन ने अपने आने वाली किताब I Do What I Do: On Reforms Rhetoric and Resolve' (मुझे जो करना होता है, वह मैं करता हूं: सुधारों का शोरगुल और संकल्प) के बारे में बात की और नोटबंदी को लेकर अपनी राय भी रखी। खबर के मुताबिक रघुराम राजन ने कहा कि उन्होंने सरकार को इस बात को लेकर आगाह किया था पर्याप्त तैयारियों के बिना नोटबंदी को लागू करना परेशानी भरा हो सकता है।
इरादा अच्छा लेकिन कीमत चुकाई
टाइम्स ऑफ इंडिया ने रघुराम राजन से हुए साक्षात्कार के हवाले से आगे लिखा है कि, सरकार ने नोटबंदी के फैसले का यह कहते हुए बचाव किया कि इससे टैक्स बेस बढ़ने से लेकर डिजिटल ट्रांजैक्शन में इजाफे तक कई दूसरे फायदे हुए हैं। राजन ने माना कि नोटबंदी के पीछे इरादा काफी अच्छा था, लेकिन इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा, 'निश्चित रूप से अब तो कोई किसी सूरत में नहीं कह सकता है कि यह आर्थिक रूप से सफल रहा है।'
नोटबंदी पर कांग्रेस हमलावर
वहीं नोटबंदी के बाद GDP में आई गिरावट से कांग्रेस सरकार पर हमलावर हो गई है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5.7 फीसदी तक गिर जाने के बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र की मांग की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'प्रचारशास्त्री' करार दिया। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि अगर पुरानी पद्धति से आंका जाए तो वास्तविक जीडीपी वृद्धि 4.3 से 4.4 फीसदी ही होगी।


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