पिछले कई दिनों से देश में वित्त वर्ष बदले जाने की खबरें हैं। अब ऐसी खबरें हैं कि वित्तवर्ष में बदलाव नहीं होगा लेकिन बजट पेश करने का समय बदल जाएगा। देश में अभी अप्रैल से मार्च का वित्त वर्ष चलता है। यह भी अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है और यह परंपरा करीब 150 साल पुरानी है। सरकार इसे बदलकर जनवरी से दिसंबर करने की सोच रही थी और उसने इसके लिए एक समिति भी बनाई थी।
संसद में दिया था वित्तमंत्री वे जवाब
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 21 जुलाई को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि वित्त वर्ष बदलने के बारे में सरकार विचार कर रही है। हालांकि, एक बड़े सरकारी अधिकारी ने बताया, 'वित्त वर्ष 2018-19 के लिए यह बदलाव फिलहाल संभव नहीं है।' उन्होंने बताया कि अगर इस साल से वित्त वर्ष में बदलाव किया गया तो इसका मतलब है कि बजट को अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में पेश करना पड़ेगा, जो संभव नहीं है।
वित्त वर्ष में बदलाव से होगी लोगों को परेशानी
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, इसके साथ एक सोच यह भी है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तौर पर एक बड़ा बदलाव लाया गया है। इसे सेटल होने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए। वहीं, जीएसटी से पहले सरकार ने नोटबंदी की थी। इन दोनों कदम का कंपनियों के बिजनस पर असर पड़ा है। ऐसे में वित्त वर्ष में अभी बदलाव करने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है।
2019 तक वित्त वर्ष में बदलाव नहीं
अगले लोकसभा चुनाव 2019 में होने हैं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार तब तक वित्त वर्ष में बदलाव नहीं करेगी। वित्त वर्ष को जनवरी से दिसंबर करने पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार शंकर आचार्य की अगुवाई में जुलाई 2016 में इसके लिए एक समिति बनाई गई थी। इस समिति को यह प्रस्ताव बहुत आकर्षक नहीं लगा।
नीति आयोग का सुझाव, वित्त वर्ष में हो बदलाव
दूसरी तरफ, नीति आयोग ने सुझाव दिया था कि वित्त वर्ष में बदलाव होना चाहिए क्योंकि अभी वाले वित्त वर्ष में वर्किंग सीजन का पूरा फायदा उठाना संभव नहीं है। उसके मुताबिक, दूसरे देशों में जनवरी से दिसंबर का वित्त वर्ष होता है। अगर भारत में इसे अपनाया जाता है तो इससे डेटा कलेक्शन पर पॉजिटिव असर होगा। एक संसदीय समिति ने भी वित्त वर्ष को अप्रैल से मार्च के बजाय बदलकर जनवरी से दिसंबर करने का सुझाव दिया था।
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