भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) नियमों में बदलाव पर विचार कर रहा है जिससे एमएनपी के आग्रह को खारिज नहीं किया जा सके। इसके तहत एमएनपी क्लियरिंग हाउस की भूमिका बढ़ाई जाएगी जिसमें प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उपभोक्ताओं का पूरा ब्योरा होगा।
UPC वैद्यता के बारे में जानना है जरुरी
जब कोई उपभोक्ता एमएनपी के लिए आग्रह करता है तो उसे विशिष्ट पोर्टिंग कोड (यूपीसी) दिया जाता है, लेकिन ग्राहक जिस नेटवर्क पर जाना चाहता है उस आपरेटरों को बकाया बिल, यूपीसी की वैधता के बारे में पता नहीं चलता, जो प्रक्रिया को पूरा करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
यूपीसी की वजह से खारिज हो रहे हैं आग्रह
नियामक ने कहा कि अप्रैल, 2016 से मार्च, 2017 के दौरान एमएनपी रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चलता है कि सभी श्रेणियों में दूरसंचार आपरेटरों द्वारा पोर्टिंग के आग्रह को खारिज किए जाने की औसत दर 11.16 प्रतिशत है। वहीं यूपीसी से मेल नहीं होना और यूपीसी की समयावधि समाप्त होने की वजह कुल खारिज आग्रह का 40 प्रतिशत बैठती है।
अभी तक नहीं व्यवस्था
ट्राई ने दस्तावेज के मसौदे में कहा है कि फिलहाल ऐसी व्यवस्था नहीं है जिससे जिस आपरेटर की ग्राहक जाना चाहता है, वह यूपीसी की समाप्ति की तारीख के बारे में जान सके।
यूपीसी की वैद्यता को मोबाइल नंबर के साथ किया जाए सांझाा
ऐसे में यह प्रस्ताव किया गया है कि मौजूदा एमएनपी प्रक्रिया में एक प्रक्रिया जोड़ी जाए जिससे यूपीसी की सामग्री और यूपीसी की वैधता को मोबाइल नंबर के साथ साझा किया जा सके।


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