सरकार ने शुक्रवार को बताया कि 178,000 शेल (मुखौटा) कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है और कुछ ऐसी कंपनियों के बारे में सेबी को सूचना दी गई है। लोकसभा में आर के सिंह, बैजयंत पांडा और शशि थरूर के प्रश्नों के उत्तर में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सदन को आश्वस्त किया कि हाल के दिनों में मुखौटा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और आगे भी कार्रवाई चलेगी।
सिर्फ पैसे घुमाने का करती हैं काम
जेटली ने कहा कि शेल कंपनी जैसी कोई चीज कंपनी अधिनियम में परिभाषित नहीं की गई है, लेकिन इस तरह की कंपनियां वो होती हैं जो कोई व्यवसाय नहीं करती और सिर्फ पैसे घुमाने का माध्यम होती हैं।
आयकर कानून के जरिए होती है कार्रवाई
उन्होंने कहा कि इस तरह की कंपनियों के मामलों से सिर्फ कंपनी कानून से नहीं निपटा जाता, बल्कि बेनामी कानून और आयकर कानून के जरिए कार्रवाई होती है। मंत्री ने बताया कि सरकार ने 178,000 ऐसी कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया है और कुछ ऐसी कंपनियों के बारे में सेबी को सूचना दी गई है जिस वजह से बाजार में थोड़ा उथल-पुथल है।
कंपनी पंजीकरण के नियमों को बनाना होगा सख्त
कुछ सदस्यों की ओर से कंपनी पंजीकरण के नियमों को सख्त बनाने की मांग पर जेटली ने कहा कि कंपनी अधिनियम के दुरुपयोग पर भी अंकुश लगाना होगा और इसके साथ ही व्यवसाय सुगम बनाना होगा।
बायोमैट्रिक व्यवस्था पर भी किया जाएगा विचार
दोनों के बीच संतुलन बनाना पड़ेगा। बैजयंत पांडा की ओर से कंपनियों के पंजीकरण में बायोमैट्रिक व्यवस्था जोड़े जाने का सुझाव दिए जाने पर जेटली ने कहा कि यह एक अच्छा सुझाव है और इस पर विचार किया जा सकता है।


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