SEBI ने की 331 शेल कंपनियों की पहचान, बंद हुई ट्रेडिंग

बाजार नियामक सेबी ने शेल कंपनियों पर शिकंजा कसते हुए सोमवार को 331 कंपनियों की सूची जारी कर दी है। इनमें लिस्‍टेड कंपनियां भी हैं।

बाजार नियामक सेबी ने शेल कंपनियों पर शिकंजा कसते हुए सोमवार को 331 कंपनियों की सूची जारी कर दी है। इनमें लिस्‍टेड कंपनियां भी हैं। काले धन पर रोकथाम लगाने के उद्देश्‍य से सेबी ने कहा है कि इन कंपनियों में इस महीने ट्रेडिंग नहीं की जाएगी। मंगलवार से यानी कि आज से इनमें ट्रेड बंद कर दिया गया है।

ये हैं कंपनियां

ये हैं कंपनियां

इन 331 कंपनियों में से 162 लिस्‍टेड कंपनियां शामिल हैं। गैलेंट इस्‍पात, जे कुमार इंफ्रा, पिनकॉन स्पिरिट, पार्शनाथ डेवलपर्स, प्रकाश इंडस्‍ट्रीज, एसक्‍यूएस बीएफएसआई, रोहित फेरो, आरईआई एग्रो और असम कंपनी आदि शामिल हैं।

क्‍या होती हैं शेल कंपनियां

क्‍या होती हैं शेल कंपनियां

एक्‍सपर्ट के मुताबिक शेल कंपनियों का रजिस्‍ट्रेशन सामान्‍य कंपनियों की तरह होता है। सामान्‍य कंपनियों की तरह इनमें डायरेक्‍टर्स होते हैं। साथ ही रिटर्न भी फाइल किया जाता है। इन कंपनियों का मालिक कोई भी हो, लेकिन ये दूसरों के काम आती है।

नियमित तौर पर नहीं करती हैं कोई बिजनेस

नियमित तौर पर नहीं करती हैं कोई बिजनेस

शेल कंपनियों में कोई खास कैपिटल नहीं होती है और न वे नियमित तौर पर कोई बिजनेस करती हैं। आमतौर पर इन कंपनियों में शेयरों का लेनदेन होता है और इसके जरिए ब्‍लैक मनी को व्‍हाइट किया जाता है। नोटबंदी के दौरान भी बड़े पैमाने पर शेल कंपनियों के जरिए ब्‍लैक मनी को व्‍हाइट किया गया।

ब्‍लैकमनी को व्‍हाइट बनाने में करते हैं मदद

ब्‍लैकमनी को व्‍हाइट बनाने में करते हैं मदद

इन कंपनियों का इस्‍तेमाल मुख्‍य रुप से ब्‍लैकमनी को कम से कम खर्च में व्‍हाइट बनाने में किया जाता है। इन कंपनियों में टैक्‍स को पूरी तरह से बचाने या कम से कम रखने की व्‍यवस्‍था होती है। इसमें पूरे पैसे को एक्‍सपेंस के तौर पर दिखाया जाता है। जिससे टैक्‍स भी नहीं लगता है।

सिर्फ कागजों पर चलता है कारोबार

सिर्फ कागजों पर चलता है कारोबार

ऑपरेशन की बात करें तो इन कंपनियों में किसी तरह का कोई काम नहीं होता, सिर्फ कागजों पर एंट्रीज दर्ज की जाती है। सरल शब्‍दों में कहें तो यह कागजों पर बनी कंपनी होती हैं।

ऐसे समझें

ऐसे समझें

उदाहरण के लिए आपके पास 50 लाख रुपए हैं तो आप अलग-अलग 10 कंपनियों के अकाउंट में डाल दूंगा। इस पैसे को एक्‍सपेंस के नाम पर उन कंपनियों के अकाउंट से निकाल दिया जाएगा या फिर एक कंपनी से दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। इस प्रोसेस को मनी लॉन्‍डरिंग कहा जाता है।

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