आरबीआई ने बुधवार को वाणिज्यिक बैंकों के रेपो या अल्पकालिक ऋण दर को 6.25 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दिया है।
आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) में सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि सरकार मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीसरी द्वैमासिक बैठक में उसके द्वारा रेपो रेट में की गई 0.25 प्रतिशत की कटौती की घोषणा का स्वागत करती है। गर्ग ने कहा कि यह एक ऐसा महत्वपूर्ण कदम है जो सतत विकास के लिए समुचित वास्तविक मौद्रिक स्थितियों से सामंजस्य बैठाने की दृष्टि से आवश्यक है और इसके साथ ही यह भारत की विकास संभावनाओं और स्थिर एवं सामान्य महंगाई दर के अनुरूप है।

सुभाष गर्ग ने कहा कि, '"हमने एमपीसी के वक्तव्य के साथ-साथ महंगाई एवं विकास आउटलुक के बारे में उसके आकलन पर गौर किया है। हम रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती का स्वागत करते हैं। यह एक ऐसा महत्वपूर्ण कदम है जो सतत विकास के लिए समुचित वास्तविक मौद्रिक स्थितियों से सामंजस्य बैठाने की दृष्टि से आवश्यक है और इसके साथ ही यह भारत की विकास संभावनाओं और स्थिर एवं सामान्य महंगाई दर के अनुरूप है।'
आपको बता दें कि निवेश में तेजी लाने की अत्यावश्यक जरूरत को देखते हुए तथा मुद्रास्फीति में पिछले तिमाही आई गिरावट के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्रमुख ब्याज दर में 25 आधार अंक की कटौती की है।
आरबीआई द्वारा यहां जारी तीसरी द्विमासिक नीति समीक्षा के दौरान बयान में कहा गया, "मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने पाया कि मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी का जोखिम कम है या फिर फिलहाल इसका खतरा नहीं है। इसी अनुसार मौद्रिक नीति में रेपो दर को 25 अंक तक घटाने का फैसला किया गया है।"
आरबीआई ने बुधवार को वाणिज्यिक बैंकों के रेपो या अल्पकालिक ऋण दर को 6.25 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दिया है। गर्वनर ने यहां मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद संवाददाताओं को बताया कि मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी के जोखिम के साथ एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) ने अपना तटस्थ रूख कायम रखा है।
देश में जून में खुदरा महंगाई दर रिकार्ड गिरावट के साथ 1.54 फीसदी पर बरकरार है, जबकि औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों से पता चलता है कि फैक्टरी उत्पादन गिरकर 1.7 फीसदी पर आ चुका है, जो पिछले साल के समान माह में 8 फीसदी था।


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