उपभोक्‍ता संरक्षण के लिए आ सकता है नया कानून

उपभोताओं के अधिकार की रक्षा करने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। 1986 से लागू उपभोक्‍ता संरक्षण कानून जल्‍द ही बदलने जा रहा है।

उपभोताओं के अधिकार की रक्षा करने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। 1986 से लागू उपभोक्‍ता संरक्षण कानून जल्‍द ही बदलने जा रहा है। नए उपभोक्‍ता संरक्षण बिल को मानसून सत्र में लोकसभा में पेश किया जाएगा। बिल का प्रारुप 2014 में तैयार किया गया था और पिछले साल लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद इसे खाद्य एवं उपभोक्‍ता मामलों की स्‍टैंडिंग कमेटी के पास भेज दिया गया। यदि कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल जाती है तो इसे मौजूदा सत्र में लोकसभा में पास कर दिया जाएगा। नया कानून उपभोक्‍ता अधिकारों में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगा।

प्रभावशाली होगी एजेंसी

प्रभावशाली होगी एजेंसी

द इकोनॉमिक टाइम्‍स के अनुसार नए बिल के तहत एक एग्जिक्‍युटिव एजेंसी और केंद्रीय उपभोक्‍ता संरक्षण प्राधिकरण की व्‍यवस्‍था होगी।अनैतिक व्‍यवसाायिक कार्यों से उपभोक्‍ताओं के बचाव के लिए जरुरत महसूस होने पर एजेंसी दखल दे सकती है। ऑर्डर या प्रोडक्‍ट वापसी के अलावा कंपनी के खिलाफ वर्गीय कार्रवाई की जा सकती है। एजेंसी अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमिशन की तरह काम करेगी।

सभी उपभोक्‍ताओं के प्रति जवाबदेही

सभी उपभोक्‍ताओं के प्रति जवाबदेही

यह वर्गीय कार्रवाई की नई अवधारणा पेश करेगी, जिसका मतलब है कि मैन्‍युफैक्‍चर्स और सर्विस प्रोवाइडर की जवाबदेही सभी उपभोक्‍ताओं के प्रति होगी ना कि केवल एक उपभोक्‍ता या समूह तक सीमित होगी। वर्गीय कार्रवाई में सभी प्रभावित उपभोक्‍ताओं को लाभ मिलता है।

नुकसान हुआ तो नपेंगे

नुकसान हुआ तो नपेंगे

मैन्‍युफैक्‍चरिंग, कंस्‍ट्रक्‍शन, डिजाइन, फॉर्मूला, टेस्टिंग, सर्विस, इंस्‍ट्रक्‍शन, पैकेजिंग आदि में कमी की वजह से उपभोक्‍ता के घायल, मृत्‍यु या किसी प्रकार के नुकसान की स्थित में उत्‍पादक और निर्माता जिम्‍मेदार होंगे।

नए कानून से मिलेगी नई शक्ति

नए कानून से मिलेगी नई शक्ति

नए कानून से उपभोक्‍ता विवादों को सुलझाने के लिए मौजूद जिला, राज्‍य या राष्‍ट्रीय स्‍तर के ढांचे में बदलाव नहीं होगा, यह केवल इन्‍हें और शक्तिशाली बनाएगा।

ऑनलाइन भी कर सकेंगे शिकायत

ऑनलाइन भी कर सकेंगे शिकायत

नए कानून में ई-कॉमर्स भी शामिल होगा। मौजूदा वक्‍त में एक उपभोक्‍ता विक्रेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई केवल लेनदेन वाले स्‍थान पर कर सकता है। नए कानून के बाद उपभोक्‍ता अपनी शिकायत ऑनलाइन या फिर अपने निवास के पास मौजूद उपभोक्‍ता अदालत में कर सकता है।

झूठा प्रचार करने वालों पर कार्रवाई

झूठा प्रचार करने वालों पर कार्रवाई

नया कानून मैन्‍युफैक्‍चरर्स के अलावा उत्‍पाद का प्रचार करने वालों को भी जवाबदेही बनाएगा।

झूठी शिकायत पर जुर्माना

झूठी शिकायत पर जुर्माना

झूठी शिकायत पर लगाम लगाने के लिए 10,000 से लेकर 50,000 रुपए तक का जुर्माना की व्‍यवस्‍था होगी।

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