अभी किसानों का कर्ज माफ नहीं करेगी उत्तराखंड की BJP सरकार!

किसानों की कर्ज माफी को पार्टी द्वारा किया गया वादा बताते हुए उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होते ही राज्य सरकार इस वादे पर अमल करेगी।

किसानों की कर्ज माफी को पार्टी द्वारा किया गया वादा बताते हुए उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होते ही राज्य सरकार इस वादे पर अमल करेगी। अजय भट्ट ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ' चुनाव के समय किसानों की ऋण माफी का वादा राज्य सरकार को पांच साल में पूरा करना है। जैसे ही प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुदृढ होगी, हम इस वादे को निभायेंगे ।' प्रदेश में पिछले दिनों हुई किसानों की मौत पर विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा राज्य सरकार पर किसानों की कर्ज माफी का दबाव बनाये जाने के सवाल पर भट्ट ने यह प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कांग्रेस पर प्रदेश की वित्तीय स्थिति खराब करने का आरोप लगाया और कहा कि वह सत्ता से जाते-जाते खजाने को भी खाली कर गयी। भट्ट ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के उस पत्र का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने पिछले मुख्यमंत्री हरीश रावत से किसानों के ऋण माफ करने की मांग की थी। इस पत्र की प्रति मीडिया को जारी करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस का चरित्र दोहरा है ।

No loan waiver for farmers in Uttarakhand, says min

उन्होंने कहा, 'अपनी सरकार से तो वे (कांग्रेस) ऋण माफ नहीं करवा पाये और अब हमारी सरकार के खिलाफ इस मुददे को लेकर आंदोलित हो रहे हैं।' भाजपा नेता ने कहा कि वह किसानों के कल्याण के लिये प्रतिबद्व है और जल्दी ही प्रदेश में एक किसान आयोग का गठन किया जायेगा ।

भट्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देने के लिये एक लाख तक के कर्ज पर ब्याज में दो प्रतिशत राहत की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा वर्ष 2013 में आयी आपदा से पीडि़त किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज दिया जा रहा है।

उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकडों से पता चलता है कि वर्ष 2004 से 2014 तक संप्रग सरकार के कार्यकाल के दौरान 1.58 लाख किसानों ने आत्म​हत्या की । उन्होंने कहा, ' दूसरे शब्दों में इन दस सालों में प्रति वर्ष पन्द्रह हजार किसानों ने आत्महत्या की।' गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश में करीब आधा दर्जन किसानों की मौतें हुई हैं जिनमें से चार मामलों में मृतकों के परिजनों का दावा है कि बैंक कर्ज वसूली के नोटिसों से परेशान होकर इन किसानों ने कथित रूप से आत्महत्या की है।

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