उद्योग संगठन एसोचैम ने सरकार से आग्रह किया कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अंतर्गत कुछ चुने हुए कृषि इनपुट्स पर करों की दरों में कटौती करें, नहीं तो रसायनिक उर्वरक के प्रयोग को बढ़ावा मिलेगा। एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने यहां वित्त मंत्री को संबोधित करते हुए कहा, "इस खंड में उच्च जीएसटी दरों के कारण रसायन के प्रयोग को सीधे-सीधे बढ़ावा मिलेगा, इससे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी आएगी और लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होगा।"

इसमें सरकार ने बॉयोफर्टिलाइजर्स, बॉयोपेस्टिसाइड्स/बॉयोलॉजिकल कंट्रोल एजेंट्स (बीसीए) और ब्रांडेड ऑर्गेनिक मैनूअर/वर्मीकंपोस्ट/फार्मयार्ड मैनूअर (एफवाईएम) पर जीएसटी की दरों को घटाने की मांग की गई। बॉयोफर्टिलाइजर्स और बॉयोलॉजिकल कंट्रोल एजेंट्स पर 12 फीसदी की दर से कर लिया जाता है, जबकि ब्रांडेड ऑर्गेनिग मैनूअर पर जीएसटी के अंतर्गत 5 फीसदी कर लगाया गया है।
संगठन ने कहा कि इस प्रकार की कराधान नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ भारत, सॉयल हेल्थ कार्ड, नमामि गंगे जैसी परियोजनाओं के खिलाफ है। क्योंकि इससे रसायनिक उर्वरक के प्रयोग को बढ़ावा मिलेगा। एसोचैम के महासचिव डी. एस. रावत ने कहा, "जीएसटी परिषद ने कुछ विशेष उत्पादों पर उच्च कर लगाया है जिसे कुछ राज्यों में छूट प्राप्त थी। इन राज्यों में पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उत्तराखंड शामिल है, जबकि कई राज्यों में इन उत्पादों पर केवल 5 फीसदी वैट लगता था।"


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