अगर फ्रॉड की जानकारी बैंक को 3 दिन के बाद बताया जाता है तो ग्राहक को 25,000 रुपये का नुकसान खुद उठाना होगा।
नई गाइडलाइन के अंतर्गत आरबीआई ने आम लोगों के लिए एक राहत की खबर प्रदान की है। जिसके अंतर्गत बैंक खाते में ऑनलाइन फ्रॉड के दौरान नुकसान होने पर अब खामियाजा ग्राहक को नहीं उठाना पड़ेगा बल्कि बैंक इसकी जिम्मेदारी खुद लेगा। इसके लिए मात्र आपको काम यह करना होगा कि फ्रॉड होने के तीन दिन की भीतर इसकी खबर आप बैंक तक पहुंचा दें।
10 दिन के अंदर आपके अकाउंट में आ जाएगा पैसा
ऑनलाइन बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के दौरान आपके खाते से जो पैसे जाएंगे या फिर जिस किसी प्रकार का भी फ्रॉड होगा उसकी जिम्मेदारी बैंक उठाएगा और 10 दिन के अंदर आपके खाते में पैसा वापस आ जाएगा। लेकिन अगर फ्रॉड की जानकारी बैंक को 3 दिन के बाद बताया जाता है तो ग्राहक को 25,000 रुपये का नुकसान खुद उठाना होगा।
अनअथॉराइज्ड ट्रांजेक्शन के बढ़ते मामलों के कारण उठाया यह कदम
जैसे आप सब लोग पिछले कई दिनों से एटीएम, डेबिट और क्रेडिट कार्ड से संबंधित फ्रॉड की खबरें पढ़ रहे हैं जिसकी वजह से आम आदमी काफी परेशान सा हो गया है। लोगों की परेशानी को देखते हुए और अनअथॉराइज्ड ट्रांजेक्शन के बढ़ते मामलों में राहत दिलाने के लिए आरबीआई ने यह कदम उठाया है।
अपना पासवर्ड न शेयर करें किसी से
अगर बैंक को यह जानकारी मिलती है कि अकाउंट होल्डर ने अपना पासवर्ड किसी और के साथ भी शेयर किया है और उसके बाद फ्रॉड की खबर आयी है तो इसका खमियाजा खुद खाता धारक को ही भुगतना होगा। इसके अलावा RBI के द्वारा बैंकों को फ्रॉड से बचाने के लिए हर ट्रांजेक्शन में SMS एलर्ट, ईमेल और एक रिप्लाई का आप्शन जरुरी कर दिया है।
ग्राहकों की अधिकतम जिम्मेदारी 10 हजार तक
आरबीआई ने यह भी कहा है कि ग्राहकों कि अधिकतम जिम्मेदारी दस हजार रुपये तक की होगी। बैंकों को ग्राहक की शून्य या सीमित जिम्मेदारी के मामलों में फ्रॉड की जानकारी मिलने पर देय राशि दस दिन के अंदर खाते में जमा करनी होगी।


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