यह कयास लगया जा रहा है कि जीएसटी के लागू हो जाने के बाद से नए घरों की कीमतें कम हो सकती हैं।
यह कयास लगया जा रहा है कि जीएसटी के लागू हो जाने के बाद से नए घरों की कीमतें कम हो सकती हैं। तो वहीं जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत ग्राहकों को रेडी टू मूव फ्लैट्स की अधिक कीमत चुकानी होगी क्योंकि डेवलपर्स (निर्माणकर्ता) बड़ी वस्तुओं पर लगने वाले कर के बोझ को घर खरीदने वाले उपभोक्ताओं पर डालने का विचार कर रहे हैं। हालाँकि नए फ्लैट्स की कीमत कम होगी जिससे आने वाले प्रोजेक्ट्स पर डेवलपर्स को थोड़ी राहत मिली है।
12% टैक्स
जीएसटी के तहत अंडर कंस्ट्रक्शन (निर्माणाधीन) प्रोजेक्ट्स पर 12% कर लगेगा अर्थात इसमें 6.5% की वृद्धि हुई है। रियल्टी पर वास्तविक जीएसटी दर 18% है परन्तु डेवलपर द्वारा लगाई गयी कुल कीमत में से एक तिहाई टैक्स भूमि के मूल्य में से काट लिया जायेगा। जीएसटी पूर्ण इनपुट सेट ऑफ क्रेडिट का विकल्प प्रदान करता है जो रेडी टू मूव इन फ्लैट्स पर लागू नहीं होता और इसके परिणामस्वरूप उच्च कर का बोझ डेवलपर को उठाना पड़ेगा या डेवलपर इसे उपभोक्ता पर डालेगा या नए कर का बोझ उठाने के लिए डेवलपर कीमते बढ़ा देंगे।
डेवलपर्स की टिप्पणी
हीरानंदानी समूह के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सुरेन्द्र हीरानंदानी कहते हैं कि "ऐसे प्रोजेक्ट्स जो प्रारंभिक चरणों में हैं उनसे डेवलपर्स को फायदा मिलेगा परन्तु रेडी टू मूव प्रोजेक्ट्स पर लगने वाले टैक्स का भार डेवलपर्स को उठाना पड़ेगा क्योंकि इन फ्लैट्स को जीएसटी कक्षा से बाहर रखा गया है।"
गेरा डेवलपमेंट के प्रबंध निदेशक गौरव गेरा कहते हैं कि जीएसटी के तहत निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स पर 12% की दर से कर लगाया गया है जिससे खरीददारों के लिए कीमतों में 6.5% की वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि " यदि जीएसटी का भुगतान उनके द्वारा किया जाता है उन्हें पूर्ण इनपुट सेट ऑफ का विकल्प मिलता है परन्तु रेडी टू मूव इन प्रॉपर्टीज़ के लिए यह लागू नहीं होता।"
पीटी आई की रिपोर्ट के अनुसार गेरा कहते हैं कि इसके परिणामस्वरुप या तो डेवलपर को कर का भार सहन करना होगा क्योंकि इसे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता या रेडी टू मूव फ्लैट्स की कीमतें बढेंगी।" बेंगलुरु स्थित मिड मार्केट डेवलपर सिट्रस वेंचर्स के सीईओ विनोद एस मेनन के अनुसार, " सभी लोग जीएसटी के सकारात्मक परिणामों के बारे में चर्चा कर रहे हैं। परन्तु यदि ध्यान से देखा जाए तो इसमें नुकसान है और किसी को भी इस बारे में स्पष्टता नही है।
मेनन ने कहा है कि एक तिहाई कटौती से प्रभावी दर 12% हो जाती है जिसमें वर्तमान प्रभावी वैट और सर्विस टैक्स मिलाकर 9% होता है, परन्तु फिर भी तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी ही है। क्योंकि क्रेडिट का पूर्वव्यापी दावा संभव नहीं है अत: यह ग्राहक और डेवलपर के बीच झगडे की जड़ बन सकता है कि कौन इसका भार उठाएगा।
रेरा और कीमत
मेनन ने कहा कि नए नियामक रेरा के साथ जुड़ने के बाद जीएसटी के कारण कागज़ी कार्यवाही बढ़ जायेगी जिससे कुल कीमत में वृद्धि होगी। हालाँकि नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन शिशिर बैजल कहते हैं कि जिस तरह नोटबंदी के कारण कुछ दिनों तक परेशानी हुई थी उसी प्रकार जीएसटी के कारण कुछ दिनों तक समस्या हो सकती है परन्तु आगे चलकर इससे लाभ ही होगा। उन्होंने पीटीआई को बताया कि "जीएसटी का उद्देश्य कर प्रणाली की दक्षता को बढ़ाना है और इसके लागू होने के बाद कुछ प्रारम्भिक समस्याएं आयेंगी| परन्तु धीरे धीरे यह देश के लिए अत्यंत कुशल कर प्रणाली साबित होगी।"
अफोर्डेबल हाउसिंग (किफायती घरों) पर कोई कर नहीं
एसआईएलए के संस्थापक और प्रबंध निदेशक साहिल वोरा ने कहा कि इससे इस सेक्टर में जबरन एकत्रीकरण होगा जिससे तकलीफ तो होगी परन्तु भविष्य में सभी को इससे फायदा होगा। आरआईसीएस ग्लोबल के सचिन संधीर कहते हैं कि "परंतु इससे अफोर्डेबल हाउसिंग सेक्टर खुश है क्योंकि इस पर कोई कर नहीं लगाया गया है। क्योंकि लगभग 70% मार्केट मध्यम से उच्च आय वर्ग के कारण चलता है अत: जीएसटी छोटे डेवलपर्स की ओर ध्यान केन्द्रित कर सकता है जो निम्न से मध्यम सेगमेंट में आता है।"
अंतर्राष्ट्रीय आवासीय निवेश के लिए अच्छा
अनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि किफायती आवासीय क्षेत्र पर जीएसटी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि जीएसटी के तहत किफायती आवासीय क्षेत्र पर कोई कर नहीं लगाया गया है। सीबीआरई साउथ एशिया के राम चंदनानी कहते हैं कि जीएसटी से आवासीय क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय निवेश भी बढेगा क्योंकि विश्व स्तर पर यह देखा गया है कि एकीकृत कर संरचना निवेश बढ़ाने के लिए उत्प्रेरक का काम करती है।
उन्होंने कहा "इसके अतिरिक्त विभिन्न संयुक्त कर हटाये जाने के कारण और एक सामान्य बाज़ार के निर्माण के कारण रियल एस्टेट से जुड़े हुए क्षेत्रों की आपूर्ति दक्षता में वृद्धि होगी जिससे वस्तुओं की डिलीवरी में तीव्रता आयेगी।" पंचशील रियल्टी के अतुल चोर्डिया ने कहा कि उनके पास केवल पूर्ण या लगभग पूर्ण होने वाले प्रोजेक्ट्स ही हैं जो निर्माण की लागत पर 12% प्रतिशत की दर से जीएसटी देंगे। चोर्डिया ने कहा कि "प्रभावी 12% टैक्स इंडस्ट्री से अधिक है क्योंकि हम सबसे उत्तम मटेरियल (सामान) का उपयोग करते हैं जिसमें से अधिकाँश 28 प्रतिशत की स्लैब में आता है जिससे कुल कीमत बढ़ जाती है।"
जीएसटी और रियल एस्टेट सेक्टर
आवासीय इकाईयों की बिक्री में लगातार होने वाली गिरावट के कारण वर्ष 2018 में रियल एस्टेट सेक्टर में भारत नकारत्मक दृष्टिकोण रखता है। इससे वर्ष 2014 से होने वाला नकद का नकारात्मक प्रवाह चालू रहेगा और इससे पहले से उच्च ऋण स्तरों में और अधिक वृद्धि होगी जिसके परिणामस्वरुप इस सेक्टर के क्रेडिट प्रोफाइल में कमजोरी आयेगी। इकोनॉमिक लॉ प्रैक्टिस फर्म के पार्टनर रोहित जैन कहते हैं कि जीएसटी के तहत माध्यमिक प्रावधानों पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है, चाहे वह इन्वेंटरी के क्रेडिट से संबंधित हो, बिक्री न किये गए स्टॉक पर क्रेडिट हो या टैक्स के अनुसार जहाँ कुछ भुगतान प्री-जीएसटी के अनुसार किया जाएगा और कुछ भुगतान नई टैक्स प्रणाली के तहत किया जाएगा।
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