अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) प्रणाली की एक मुख्य समस्या इसकी कई दरों वाली संरचना है।
अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) प्रणाली की एक मुख्य समस्या इसकी कई दरों वाली संरचना है।

नीति आयोग के सदस्य व जाने-माने अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) प्रणाली की एक मुख्य समस्या इसकी कई दरों वाली संरचना है। देबरॉय के अनुसार, जीएसटी में कई दरें, विलासितापूर्ण मानी जाने वाली वस्तुओं पर अप्रत्यक्ष कर के रूप में कर लगाने की इच्छा से उत्पन्न होती हैं।
देबरॉय ने आज तक की ओर से आयोजित जीएसटी कॉन्क्लेव में कहा, "कृपया समझें कि ये कई सारी दरें अप्रत्यक्ष कर नीति के जरिए दूसरे छोरों तक पहुंचने की इच्छा से उत्पन्न होती हैं, और दूसरी चिंताएं राज्यों की हैं।"
उन्होंने कहा, "और इसमें आप के पास ढेर सारी वस्तुओं को बाहर रखा गया है, कई सारी वस्तुए हैं, जिन्हें जीएसटी से बाहर रखा गया है और बहुत सारी दरें हैं।" मौजूदा जीएसटी में कर दरें चार स्लैब में बांटी गई हैं-- पांच फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी व 28 फीसदी--जैसा कि जीएसटी परिषद ने तय किया है। देबरॉय ने कहा कि दरों के अलावा मौजूदा जीएसटी प्रणाली सही तौर पर व्यवस्थित नहीं है, लेकिन यह इस दिशा में एक कदम है।


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