दरअसल केंद्र सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए कहा है कि जो भी ऑफिसर रैंक का सैनिक शांति पूर्ण इलाकों में तैनात रहेगा उसे राशन भत्ता दिया जाएगा।
हेडलाइन पढ़ कर आप भी चौंक गए होंगे लेकिन ये वाकई में सच है, मोदी सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया है। 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ये किसी खुशखबरी से कम नहीं है लेकिन वेतन आयोग को लेकर सैनिकों में थोड़ा रोष है। हालांकि कोई भी सैनिक इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं कर रहा है फिर भी सातवें वेतन आयोग में लागू किए गए नए नियमों से वह थोड़ा चौंक जरूर गए हैं।

आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर मुद्दा क्या है, दरअसल केंद्र सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए कहा है कि जो भी ऑफिसर रैंक का सैनिक शांति पूर्ण इलाकों में तैनात रहेगा उसे राशन भत्ता दिया जाएगा। यहां ये स्पष्ट है कि राशन भत्ता मिलेगा राशन नहीं। हालांकि सरकार ने आगे ये भी लिखा है कि उसे राशन की जगह उस राशन का भत्ता मिलेगा जो कि उस सैन्य अधिकारियों के वेतन में जुड़ कर आएगा।

वहीं अब यहां ये पेंच बनता है कि अगर अफसर को उसके वेतन में पैसे जुड़कर मिलेंगे तो फिर वह पैसे टैक्स टैक्स में कटेंगे, ऐसे में सैन्य अधिकारी अब अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पहले सैन्य अधिकारियों को महीने का राशन मिलता था अब अगर वह शांतिपूर्ण इलाकों में तैनात हैं तो उन्हें राशन की बजाय भत्ता मिलेगा। हालांकि इस बात की उम्मीद की जा रही है कि सरकार शायद अपने इस फैसले को बदल दे।
हालांकि पहले सरकार की तरफ से ये विकल्प रहता था कि सैन्य अधिकारी राशन ले सकते हैं या फिर राशन का भत्ता, इस विकल्प में ज्यादातर सैन्य अधिकारी राशन ही चुनते थे। अब इस बार सातवें वेतन आयोग में सरकार ने ये स्पष्ट नहीं किया है कि वह राशन या फिर राशन के बदले भत्ते का विकल्प दे रही है या नहीं। क्योंकि जो जानकारी प्रेस इंन्फॉर्मेशन ब्युरो द्वारा दी गई है उसमें इस बात का जिक्र नहीं किया गया है। इसलिए ये पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता है कि सरकार ने सैन्य अधिकारियों का राशन बंद कर दिया है।


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