3 साल मोदी सरकार: वित्तीय मोर्चे पर सफल या असफल, देखें सर्वे

मोदी सरकार के तीन साल पूरे हो चुके हैं और हर तरफ यही सवाल है कि आखिर मोदी सरकार इन तीन वर्षों में अपने किए गए वादों में पास हुई या फेल।

मोदी सरकार के तीन साल पूरे हो चुके हैं और हर तरफ यही सवाल है कि आखिर मोदी सरकार इन तीन वर्षों में अपने किए गए वादों में पास हुई या फेल। ये भारतीय राजनीति में शायद पहली बार है कि जब किसी सरकार की जवाबदेही हर साल जनता के सामने आंकड़ो के रुप में सामने आ रही है। मोदी सरकार के हर मंत्री अपने काम काज का पूरा ब्यौरा पेश करेंगे जिससे जनता को एक मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में हुए कार्यों का एक आंकड़ा मिल सकेगा। यहां हम आपको बताएंगे कि मोदी सरकार पिछले तीन वर्षों में वित्तीय मोर्चे पर कितनी सफल रही है साथ ही कालेधन और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मोदी सरकार के कार्यकाल में कितना सुधार हुआ है।

वित्तीय मोर्चे पर क्या रहा मोदी सरकार का हाल

वित्तीय मोर्चे पर क्या रहा मोदी सरकार का हाल

मोदी सरकार वित्तीय मोर्चे पर बहुत ही तेजी से काम कर रही है। सरकार का मानना है कि देश के विकास की कुंजी वित्तीय मोर्चे पर मजबूती है। यदि राष्ट्र का वित्त मजबूत रहेगा तो सरकार हर मोर्चे का सामना करने में सक्षम रहेगी। मोदी सरकार ने देश में निवेश को लेकर एक बेहतर माहौल बनाया है। अगर मोदी सरकार के कार्यकाल में जापान ने निवेश किया है तो चीन ने भी निवेश किया है, यूरोपीय देशों और अमेरिका ने भी भारत में बड़े निवेश का करार किया है। इसके बाद मोदी सरकार की मेक इन इंडिया नीति के तहत दुनिया भर की तमाम बड़ी कंपनियां भारत में अपना कारखाना लगाने के लिए प्रयासरत हैं। मोबाइल फोन बनाने वाली अग्रणी कंपनी एपल आईफोन और चीन की एमआई अब भारत में भी आ चुकी हैं। एपल का एसेंबलिंग सेंटर भारत में शुरु होचुका है जबकि रेडमी ने आंध्रप्रदेश के श्रीपुर में अपना कारखाना ही लगा दिया है।

कारोबारी माहौल में सुधार

कारोबारी माहौल में सुधार

अमेरिका की जानी मानी कंपनीं लॉकहीड मार्टिन ने मोदी सरकार के सामने बहुत बड़ी योजना का खाका रखा है। लॉकहीड मार्टिन ने भारत में अपना कारखाना खोलने का मन बनाया है और वह भारत में ही F-16 फाइटर प्लेन का निर्माण और निर्यात करना चाहती है। इसके साथ ही कंपनी भारत को तकनीक देने और भारत को F-16 देने की योजना बना रही है। हालांकि अभी इस मुद्दे पर किसी तरह का फैसला नहीं हुआ है फिर भी लॉकहीड मार्टिन का यह कदम दर्शाता है कि भारत में कारोबारी माहौल पहले से कहीं बेहतर है।

कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार की मुहिम

कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार की मुहिम

मोदी सरकार ने पहले दिन से ही कालेधन के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था। सरकार बनने के कुछ दिनों बाद ही मोदी सरकार ने कालेधन के खिलाफ एसआईटी का गठन कर दिया था। इसके अलावा मोदी सरकार ने देश में ब्लैक मनी और भ्रष्टाचार के गठबंधन पर चौंकाने वाला हमला किया और एक झटके में देश में प्रचलित 1000 और 500 रुपए के नोट को बंद कर दिया। सरकार ने नोटबंदी के जरिए कालेधन को बहुत हद तक कम कर दिया। वहीं इससे भ्रष्टाचार में भी कमी देखी गई। समाचार पोर्टल नवभारत टाइम्स ने मोदी सरकार के कार्यकाल में कालेधन के खिलाफ मुहिम पर एक सर्वे भी प्रकाशित किया है। इसमें विभिन्न समाचार पत्र समूहों का सर्वे शामिल है। कालेधन के खिलाफ मुहिम पर टाइम्स ऑफ इंडिया के सर्वे में, 23 फीसदी लोगों ने इसे अच्छा करार दिया है जबकि 33 फीसदी लोगों ने मोदी सरकार की मुहिम को असरदार माना है, 29 फीसदी लोगों की राय है कि मोदी सरकार की मुहिम और बेहतर हो सकती है, जबकि सिर्फ 15 फीसदी लोगों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार की मुहिम को बेअसर माना है।

मोदी सरकार के कार्यकाल का सबसे बड़ा फैसला

मोदी सरकार के कार्यकाल का सबसे बड़ा फैसला

मोदी सरकार के कार्यकाल में यूं तो तमाम फैसले लिए गए लेकिन उन तमाम फैसलों में कौन सा फैसला बेहद असरदार और बड़ा रहा इसे लेकर लोगों में थोड़ा असमंजस है। नवभारत टाइम्स के ही सर्वे में इस बारे में लोगों की राय प्रकाशित की गई है जिसमें 56 फीसदी लोगों ने नोटबंदी को बड़ा फैसला माना है जबकि 15 फीसदी लोगों ने जीएसटी (GST) को बड़ा फैसला माना है। वहीं जन-धन खाते को शुरु करने की मुहिम को 7 फीसदी लोगों ने बड़ा फैसला माना है। 13 फीसदी लोगों ने सर्जिकल स्ट्राइक और 9 फीसदी लोगों ने स्वच्छ भारत अभियान को मोदी सरकार का बड़ा फैसला मांगा है।

क्या जीवन स्तर में आया सुधार?

क्या जीवन स्तर में आया सुधार?

नवभारत टाइम्स के ही एक अन्य सर्वे में लोगों के जीवन स्तर को लेकर सर्वे किया गया है जिसमें लोगों से पूछा गया है कि मोदी सरकार के आने के बाद लोगों के जीवन स्तर पर क्या असर पड़ा है। इसमें 11 फीसदी लोगों ने माना है कि मोदी सरकार के दौरान भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है, वहीं 33 फीसदी लोगों ने माना है कि नई नौकरियां पैदा हुई हैं, जबकि 4 फीसदी लोगों के मुताबिक किसानों की दशा में सुधार हुआ है।

निर्यात में बेहतर प्रदर्शन

निर्यात में बेहतर प्रदर्शन

इस प्रतिकूल परिस्थिति में, मार्च 2017 में भारत ने निर्यात में दो अंकों की बढ़ोतरी के लक्ष्य को पाने के लिए बेहतर प्रदर्शन किया, जो पिछले तीन साल पहले की तुलना में पिछले सभी उच्च वृद्धि के आकड़ों को पार कर गया। अक्टूबर 2014 के बाद से करीब दो सालों तक नकारात्मक स्थिति में रही भारत की निर्यात विकास दर, सितंबर 2016 में सकारात्मक स्थिति में पहुंच गई। इसके बाद से ही, इस निर्यात विकास दर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

जीएसटी से होगा लाभ

जीएसटी से होगा लाभ

यदि सेवाओं को निर्यात में शामिल किया जाता है, तो दोतरफा व्यापार एक खरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। भारत के व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक अन्य कारक अप्रत्यक्ष कर है, जो इस वर्ष जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर के रूप में लागू होने जा रहा है। एक राष्ट्र, एक कर और एक साझा बाज़ार व्यवस्था लेनदेन की लागत को कम करने के साथ-साथ लॉजिस्टिक में खपने वाले समय को कम करने जा रही है, ताकि व्यापार को कई गुणा बढ़ाया जाए। डीजीएफटी पहले से ही जीएसटी के साथ मिलकर दरों को संरेखित करने पर कार्य कर रही है।

48 फीसदी बढ़ी FDI

48 फीसदी बढ़ी FDI

वर्ष 2014-15 में 36 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 48 फीसद बढ़कर वर्ष 2015-16 में 53 बिलियन डॉलर पहुंच गया। इस प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के चलते व्यापार को भी गति मिली। वर्ष 2016-17 में दिसंबर माह तक भारत को 47 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि यह पिछले वर्ष के 53 बिलियन डॉलर के एफडीआई से आगे निकल जाएगा।

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा

विदेशी मुद्रा भंडार वर्ष 2014 के 312 बिलियन डॉलर से बढ़कर वर्ष 2016 में 365 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। नियमों का सरलीकरण, 1200 अप्रचलित कानूनों को खत्म करना, रियल एस्टेट नियामकों की स्थापना के लिए रियल एस्टेट विधेयक, एक मुख्य निर्यात वस्तु अर्थात् रत्न उद्योग के लिए ई-मार्केट की स्थापना और कई अन्य पहलों ने पिछले 2-03 वर्षों के दौरान व्यापार करने के प्रक्रिया को काफी सरल एवं बेहतर बनाया है।

आयात शुल्क संरचना को पटरी पर लाने का प्रयास

आयात शुल्क संरचना को पटरी पर लाने का प्रयास

विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ, तेज़ी के बढ़ते निर्यात का लाभ उठाने के लिए मोदी सरकार ने उलट आयात शुल्क संरचना को वापस पटरी पर लाने के लिए कई अहम उपाय किए हैं। सरकार द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे सुधार, 2020 तक अनुमानित 882 बिलियन डॉलर के भारत के व्यापार निर्यात के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे।

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