बाबा रामदेव के विश्वासपात्र होने के नाते पतंजलि आयुर्वेद में बालकृष्ण की 94% हिस्सेदारी है, लेकिन फिर भी वे अपनी कमाई का एक पैसा भी घर नहीं लेकर जाते।
बाबा राम द्वारा स्थापित पतंजलि आयुर्वेद अब दूसरी सबसे बडी कमाई वाली कंपनी बन गई है। इसे इस मुकाम तक लाने वाले और कोई नहीं बल्कि आचार्य बालकृष्ण हैं। पहले नंबर पर आने के लिए कंपनी को हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) कंपनी को पछाड़ना होगा। इस कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में 30,783 करोड़ रुपए का कारोबार किया था।
बाबा रामदेव के विश्वासपात्र
बाबा रामदेव के विश्वासपात्र होने के नाते पतंजलि आयुर्वेद में बालकृष्ण की 94% हिस्सेदारी है, लेकिन फिर भी वे अपनी कमाई का एक पैसा भी घर नहीं लेकर जाते। वे दिन में 15 घंटे काम करते हैं, रविवार तथा छुट्टी वाले दिन भी काम करते हैं। आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि उन्होंने अभी तक एक दिन भी छुट्टी नहीं ली।
पारंपरिक सीईओ नहीं हैं
43 साल की उम्र में सीईओ के पद पर काम करने वाले कई लोग होंगे, लेकिन आचार्य वालकृष्ण का काम करने का ढंग थोड़ा अलग है। वे आईफोन का इस्तेमाल करते हैं लेकिन उनके दफ्तर में कोई कंप्यूटर नहीं है। इतना ही नहीं, सफेद कुर्ता और धोती पहन कर काम करने वाले आचार्य जी को प्रिंट आउट से पढ़ना पसंद है। वे अपने कार्य स्थल में केवल हिंदी भाषा ही बोलते हैं।
कुशल रणनीति
बालकृष्ण का मानना है कि उनकी "कड़ी मेहनत" से पतंजलि आयुर्वेद कम समय में एक समृद्ध कंपनी बनी है। सफलता पाने के लिए पतंजलि आयुर्वेद ने अन्य कंपनी से विपरीत मार्केटिंग रणनीति अपनाई है। जहां अन्य कंपनियां नए उत्पादों को सतर्कता से लॉन्च करती हैं वहीं पतंजलि ने बिना किसी हिचकिचाहट के अब तक 400 से भी अधिक उत्पाद लॉन्च किए हैं।
पतंजलि की लोकप्रियता
कुछ विपणन गुरुओं का मानना था कि हर उप-ब्रांड के साथ पतंजलि के नाम का जुड़ना कंपनी के विकास में बाधाएं पैदा कर सकता है। बालकृष्ण का मानना है कि पतंजलि ने भारतीय ग्राहक की सोच को बदल दिया है तथा अब ग्राहक भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय उत्पादों से कम नहीं समझते। बालकृष्ण ने कहा, "हमें मानक विपणन प्रथाओं का पालन करने की जरूरत नहीं है। यदि आपकी जडें मज़बूत हैं तो आपको कोई नहीं गिरा सकता।"
जमीन से आसमान तक पहुंचे
2011 में सीबीआई ने बालकृष्ण के खिलाफ धोखाधडी का मामला दर्ज किया था। परंतु दो साल पहले बालकृष्ण को इस केस में क्लीन चिट मिली। अपने दुखद अतीत से बाहर निकल कर बालकृष्ण ने खुद को सफलता की नीव पर खड़ा किया। बालकृष्ण अपने गुरु की हर सलाह मानते हैं तथा उनकी तारीफ करते नहीं थकते।
काम करने का एक अलग तरीका अपनाते हैं
पतंजलि का वर्क कल्चर काफी अलग है। यहां "हाय" या "नमस्ते" की बजाय "ओम" कह कर प्रणाम किया जाता है। दफ्तर में शराब, धूम्रपान एवं मांस खाना मना है। पतंजलि आयुर्वेद 30:70 के लिंग विविधता अनुपात का दावा करता है। हालांकि, पतंजलि में काम करने वालों का वेतन बहुत ज्यादा नहीं है। बालकृष्ण का कहना है कि पतंजलि में लोग काम करने के भाव से नहीं बल्कि सेवा भाव से आते हैं।


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