आखिर क्यों भारत ने पड़ोसियों पर लुटा दिए 450 करोड़ रुपए?

अभी भी लोगों के मन में एक बार रह-रह कर उठ रही है कि आखिर भारत ने अपने पड़ोसियों पर 450 करोड़ रुपए क्यों लुटा दिए। इस सवाल का जवाब हम आपको आगे दे रहे हैं।

हाल ही में भारत ने पाकिस्तान को छोड़ कर अन्य दक्षिण एशियाई देशों के लिए एक सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा है, उपग्रह से प्रत्येक देश को डीटीएच, वीसैट क्षमता और आपदा सूचना के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। पर अभी भी लोगों के मन में एक बार रह-रह कर उठ रही है कि आखिर भारत ने अपने पड़ोसियों पर 450 करोड़ रुपए क्यों लुटा दिए। इस सवाल का जवाब हम आपको आगे दे रहे हैं।

भारत का अन्य देशों के बीच राजनीतिक संबंध

भारत का अन्य देशों के बीच राजनीतिक संबंध

GSLV-F 09 को ले जाने वाले भारत के जीओसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वाहन (जीएसएलवी-एफ09) को शुक्रवार 05 मई, 2017 को अंतरिक्ष में छोड़ा जा चूका है। जीएसएलवी-एफ 0 9 मिशन जीएसएलवी की ग्यारहवीं उड़ान है, और स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी स्टेज (सीयूएस) के साथ चौथी लगातार उड़ान, जीएसएलवी-एफ 0 9 सतीश धवन स्पेस सेंटर शार (एसडीएससी शार), श्रीहरिकोटा में दूसरी लॉन्च पैड (एसएलपी) से लॉन्च किया गया है। जीसैट- 9 को भारत की ओर से उसके दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के लिए उपहार माना जा रहा है। यह उपग्रह इसरो का रॉकेट जीएसएलवी एफ- 09 को लेकर गया है।

अब सबकी आंखें अंतरिक्ष पर

अब सबकी आंखें अंतरिक्ष पर

GSLV-F 09 के सफलतापूर्वक लॉन्च के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों को उनके सफलतापूर्वक परीक्षण के लिए बधाई दी और कहा कि यह दक्षिण एशिया के लिए हमारी तरफ से बहुत बड़ा तोफा है। आठ सार्क देशों में से सात भारत, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और मालदीव इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। पाकिस्तान ने यह कहते हुए इससे बाहर रहने का फैसला किया कि उसका अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम है।

दक्षिण एशियाई देशों के लिए 450 करोड़ रुपए का उपहार

दक्षिण एशियाई देशों के लिए 450 करोड़ रुपए का उपहार

GSLV-F 09 का डेटा नेपाल, भूटान, मालदीव, बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ साझा किया जाएगा। पाकिस्तान को भी इसका डेटा दिया जाना था लेकिन उसने मना कर दिया। इसी तरह अफगानिस्तान के साथ भी कोई समझौता नहीं हो पाया। इस उपग्रह की वजह से भारत की पकड़ पूरे दक्षिण एशिया में और मजबूत होगी। उपग्रह की मदद से इसमें साथ में आये राष्ट्रों को करीब 10,000 करोड़ रुपये (1.5 अरब डॉलर) फ़ायदा होगा।

जीएसएलवी-एफ 09 का उद्देश्य

जीएसएलवी-एफ 09 का उद्देश्य

GSLV-F 09 एक जियोस्टेशनरी कम्युनिकेशन सैटेलाइट है जिसका उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के कवरेज के साथ केयू बैंड में विभिन्न संचार अनुप्रयोगों को उपलब्ध कराने का उद्देश्य है। साथ ही इस उपग्रह से प्रत्येक देश को डीटीएच, वीसैट क्षमता और आपदा सूचना के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

GSLV-F 09 की विशेषता

GSLV-F 09 की विशेषता

GSLV-F 09 इसरो की मानक I-2K बस के आसपास बनाया गया है, जिसमें 2230 किलोग्राम के बड़े पैमाने पर लिफ्टकिया गया है। उपग्रह की मुख्य संरचना क्यूब के आकार में है। केंद्रिय सिलेंडर के आसपास निर्मित होकर मिशन की आयु 12 साल से अधिक की है।

पाकिस्तान ने एक मौका गंवा दिया

पाकिस्तान ने एक मौका गंवा दिया

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के हाथ से यह बहुत बड़ा मौका चला गया है, क्योंकि इनकी खुद की अंतरिक्ष कार्यशाला भारत के मुकाबले पुरानी हो चूकी है। पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी "पाकिस्तान अंतरिक्ष और ऊपरी वायुमंडल अनुसंधान आयोग (एसयूपीआरओ)" इसरो से भी पुराना है और इस्लामाबाद में अपना पहला अंतररिक्ष यान पांच साल पहले ही भेज दिया था। आज के समय में पाकिस्तान के पास हैवी ड्यूटी लॉन्चर्स और उपग्रह निर्माण सुविधाओं की कमी हैं।

चीन

चीन

दक्षिण एशिया सैटेलाइट इंडिया की मुख्य योजना है की वह चीन का उसके पड़ोसी देशों में सामना करना पड़ेगा। लेकिन यह भी सच्चा है कि 21 वीं सदी की शुरुवात में ही चीन ने एशियाई अंतरिक्ष में पहले से ही अपनी पकड़ बना रखी है।

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