भारत में दुनिया को तमाम संभावनाएं दिख रही हैं। अब भारत भी इसका फायदा उठा रहा है, दोपहिया ऑटोमोबील क्षेत्र में भारत ने चीन को काफी पीछे छोड़ दिया है।
एक वक्त तक चीन भारत से कई मामलों में आगे था लेकिन अब तेजी से बढ़ती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था एक-एक करके चीन को विभिन्न क्षेत्रों में पीछे धकेल रही है। दुनिया के लिए एक बड़ा बाजार बन चुके भारत में दुनिया को तमाम संभावनाएं दिख रही हैं। अब भारत भी इसका फायदा उठा रहा है, दोपहिया ऑटोमोबील क्षेत्र में भारत ने चीन को काफी पीछे छोड़ दिया है।
भारत ने चीन को छोड़ा पीछे
भारत चीन से आगे निकलकर दुपहिया वाहनों का सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है। यहां पिछले साल 17.7 मिलियन टू व्हीलर बिके, रोजाना 48,000 से ज़्यादा। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबील मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) और चाइना एसोसिएशन ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के अधिकारियों के अनुसार चाइना 16.8 मिलियन यूनिट बेचते हुये भारत से पीछे है।
भारत आगे क्यों?
देश की दूसरी सबसे बड़ी टू व्हीलर कंपनी होंडा मोटरसाइकिल और स्कूटर इंडिया के सीनियर वीपी (सेल्स & मार्केटिंग) वाईएस गुलेरिया के हवाले से समाचार पोर्टल इकोनॉमीक टाइम्स ने खबर प्रकाशित लिखा है कि, भारत में मोबिलिटी की बहुत बड़े स्तर पर ज़रूरत है, और हम विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं"। आसान फाइनेंस विकल्प, नए और ज़्यादा फ्युल-एफिसियंट मॉडल्स, बढ़ती आय और ई-कॉमर्स जैसे बिजनेस मॉडल्स आने से लोगों को खरीदने में मदद मिली है।
लड़कियों ने मारी बाजी
आय बढ़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ एक सेल्स के बढ़ने का एक बड़ा कारण है महिलाएं, जो कि आज अपने गीयरलेस स्कूटर्स से घरों से बाहर निकलकर सिटी ट्रैफिक का सामना कर रही हैं। स्कूटर मार्केट के लीडर होंडा के बाज़ार में महिलाओं का शेयर 35% है।
ग्रामीण लोग भी हो रहे हैं दुपहिया पर सवार
भारत की सबसे बड़ी कंपनी, हीरो मोटोकोर्प के एक बड़े अधिकारी के अनुसार छोटे शहरों और नॉन-अर्बन एरियाज़ में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास होने से मांग बढ़ी है। एक अधिकारी ने बताया है कि सरकार भी अब गावों में और छोटे कस्बों में बड़े स्तर पर संरचनात्मक विकास कर रही है इससे भी मांग बढ़ रही है।
लगातार ग्रोथ हो रही है
मेट्रो और बड़े शहरों में बुनियादी ढांचे में बदलाव के कारण भी बिक्री बढ़ी है। अधिकारों के अनुसार अगले कुछ सालों में भी यह वृद्धि जारी रहेगी। होंडा के गुलेरिया के अनुसार हम आने वाले सालों में 9-11% की ग्रोथ करेंगे।
महंगे टू व्हीलर्स की डिमांड है
केवल छोटे और सस्ते ही नहीं बल्कि बड़े और महंगे टू व्हीलर्स की मांग भी बड़े स्तर पर बढ़ रही है। रॉयल इंफील्ड ने पिछले साल 30% की सेल्स ग्रोथ की और अब कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है। यूके की ट्राइंफ मोटरसाइकिल और अमेरिकन हार्ले डेविडसन जैसी प्रीमियम बाइक निर्माताओं की स्लेस भी बढ़ी है और ऐसी बाइक्स की भी भारत में मांग बढ़ी है।
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