अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मंगलवार को भारत के आर्थिक परिदृश्य के संबंध में कहा कि नोटबंदी की पहल के साथ नकदी की कमी के कारण पैदा हुआ अस्थायी अवरोधों के 2017 में समाप्त हो जाने की उम्मीद है।
अब से दो महीने पहले तक तमाम रेटिंग ऐजेंसी और दुनिया की प्रमुख वित्तीय संस्थाएं भारत की वृद्धि दर को कम करके आंका था वही एजेंसियां अब नोटबंदी के बाद हुए देश में बदलाव को सकारात्म लेते हुए भारत की वृद्धि दर को यानि जीडीपी को 7.7 फीसदी के आस-पास रहने का अनुमान लगा रही हैं।
दीर्घकालिक संरचनात्मक अवरोधकों को हटाने की सिफारिश
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने बाजार की दक्षता बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक संरचनात्मक अवरोधकों को हटाने की सिफारिश करते हुए 9 मई यानि मंगलवार को कहा कि विमुद्रीकरण से उत्पन्न बाधाओं के बाद अब भारत की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2017-18 में 7.2 फीसदी, जबकि वित्त वर्ष 2018-19 में 7.7 फीसदी पर पहुंचने की उम्मीद है।
2017 के अंत तक खत्म हो जाएगी मुद्रा की कमी
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मंगलवार को भारत के आर्थिक परिदृश्य के संबंध में कहा कि नोटबंदी की पहल के साथ नकदी की कमी के कारण पैदा हुआ अस्थायी अवरोध (प्रमुख तौर पर निजी उपभोग के लिये) 2017 में धीरे-धीरे समाप्त हो जाने की उम्मीद है।
7.7 रह सकती है भारत की वृद्धि दर
मुद्रा कोष ने भारत के आर्थिक परिदृश्य संबंधी रपट में कहा कि हालांकि अनुकूल मॉनसून से इस प्रकार के अवरोधों से निकलने और आपूर्ति संबंधी बाधाओं को हल करने की दिशा में निरंतर प्रगति होने की उम्मीद है। इसके साथ ही हालांकि निवेश क्षेत्र में मामूली सुधार रहने की उम्मीद है, जबकि कर्ज अदायगी और संपत्तियों की बिक्री तथा औद्योगिक क्षमता के उपयोग में बढ़ोतरी जारी रहेगी। IMF ने कहा, ‘भारत की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2017-18 में 7.2 प्रतिशत और उसके बाद वित्त वर्ष 2018-19 में 7.7 प्रतिशत रहेगी।'
कृषि उत्पादकता बेहतर करना एक चुनौती
नोटबंदी के अस्थायी प्रभावों से भारत की वृद्धि में गिरावट आएगी। साथ ही दक्षिण कोरिया में राजनीतिक अनिश्चिता के चलते ऐसा होगा रिपोर्ट के अनुसार भारत में कृषि उत्पादकता को बेहतर करना एक चुनौती बनी रहेगी। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां सबसे ज्यादा श्रम लगता है और यह भारत की लगभग आधी आबादी का रोजगार भी है।
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