GST की 4 दरें तय, पान मसाला पर 135% लगेगा उपकर!

GST परिषद ने इसके साथ ही जीएसटी व्यवस्था में सबसे उंची 28 % के उपर लगने वाली उपकर की दर को अधिकतम 15% तय किया है।

वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था के एक जुलाई 2017 से लागू होने की राह आसान होती नजर आ रही है। जीएसटी परिषद ने इस व्यवस्था को लागू करने में सहायक राज्य और संघ शासित प्रदेशों से जुड़े विधेयक के प्रारूपों पर आज अपनी सहमति की मुहर लगा दी।जीएसटी परिषद ने इसके साथ ही जीएसटी व्यवस्था में सबसे उंची 28 प्रतिशत के उपर लगने वाली उपकर की दर को अधिकतम 15 प्रतिशत तय किया है।

लग्जरी आइटम्स पर ज्यादा टैक्स

लग्जरी आइटम्स पर ज्यादा टैक्स

नई व्यवस्था में सबसे उंची दर भोग विलासिता के सामान और वातित पेय पदार्थों पर लागू होगी। इसे देखते हुये परिषद ने इस दर के उपर उपकर लगाने की अधिकतम सीमा तय कर दी।

उपकर कोष बनाया जाएगा

उपकर कोष बनाया जाएगा

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी परिषद के फैसलों की जानकारी देते हुये कहा कि नई व्यवस्था में अहितकर वस्तुओं पर वास्तविक उपकर की दर अधिकतम दर से कम ही रह सकती है क्योंकि परिषद ने इस मामले में ज्यादा गुंजाइश नहीं छोड़ी है। उपकर से मिलने वाली राशि से एक कोष बनाया जायेगा।जीएसटी व्यवस्था लागू होने के पहले पांच साल के दौरान राज्यों को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिये इस कोष का इस्तेमाल किया जायेगा।

कुल 40 फीसदी तक लग सकता है टैक्स

कुल 40 फीसदी तक लग सकता है टैक्स

जेटली ने उपकर पर उदाहरण देते हुये कहा, लग्जरी कार पर इस समय कुल 40 प्रतिशत कर लगता है। जीएसटी व्यवस्था में इस पर सबसे उंची दर 28 प्रतिशत के हिसाब से कर लगेगा और 12 प्रतिशत की दर से उपकर लगेगा जिससे कि कुल कर की दर को पहले के स्तर पर ही रखा सकेगा।

पान-मसाला पर 135% टैक्स

पान-मसाला पर 135% टैक्स

जीएसटी व्यवस्था में उपकर की अधिकतम 15 प्रतिशत दर का इस्तेमाल लग्जरी कारों, वातित पेय पदार्थों जैसे उत्पादों पर किया जायेगा। जबकि पान मसाला उत्पादों पर उपकर की अधिकतम दर मूल्यानुसार 135 प्रतिशत तय की गई है। जीएसटी परिषद की 12वीं बैठक में राज्य जीएसटी (एस-जीएसटी) और संघ शासित प्रदेश जीएसटी (यूटी-जीएसटी) से जुड़े विधेयकों के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई। परिषद ने अपनी पिछली बैठक में केन्द्रीय जीएसटी (सी-जीएसटी) और एकीकृत जीएसटी (आई-जीएसटी) विधेयकों के प्रारूप को भी मंजूरी दे दी थी।

जीएसटी मुआवजा विधेयक पर भी होगी बैठक

जीएसटी मुआवजा विधेयक पर भी होगी बैठक

जेटली ने बताया कि जीएसटी मुआवजा विधेयक के साथ ही एस-जीएसटी और यूटी-जीएसटी जैसे सहायक विधेयकों को मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जायेगा और उसके बाद संसद के चालू बजट सत्र में संबंधित विधेयकों को पेश कर दिया जायेगा। संसद का चालू बजट सत्र 12 अप्रैल को समाप्त होगा।

इसी सत्र में मुआवजा विधेयक पारित कराने की कोशिश

इसी सत्र में मुआवजा विधेयक पारित कराने की कोशिश

सरकार को उम्मीद है कि केन्द्रीय-जीएसटी, एकीकृत-जीएसटी, यूटी-जीएसटी और जीएसटी मुआवजा विधेयकों को चालू बजट सत्र में ही पारित करा लिया जायेगा। इसके साथ ही राज्य विधानसभाओं में भी एस-जीएसटी को पारित करा लिया जायेगा ताकि अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र की इस व्यवस्था को एक जुलाई 2017 से लागू किया जा सके।

4 दरों में जीएसटी का निर्धारण

4 दरों में जीएसटी का निर्धारण

जेटली ने बताया कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक 31 मार्च को होगी जिसमें नियमों को मंजूरी दी जायेगी। इसके बाद विभिन्न वस्तुओं और सामानों को जीएसटी की चार दरों 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत में रखा जायेगा।

15 फीसदी उपकर लगाने का विकल्प खुला

15 फीसदी उपकर लगाने का विकल्प खुला

एक अधिकारी ने बताया कि तंबाकू, वातित पेय पदार्थों, लग्जरी कारों के अलावा जीएसटी परिषद ने अन्य सामानों पर 15 प्रतिशत उपकर लगाने के विकल्प को खुला रखा है। ‘उपकर पांच साल तक जारी रहेगा और आगे भी इसे जारी रखा जा सकता है। परिषद ने किसी भी वस्तु अथवा उत्पाद पर इसे लगाने का विकल्प खुला रखा है। इस बारे में केन्द्र और राज्य जब भी फैसला करेंगे यह लागू किया जा सकता है।'

लग्जरी की परिभाषा तय होगी

लग्जरी की परिभाषा तय होगी

बहरहाल, लग्जरी कार की परिभाषा क्या होगी इसके बारे में परिषद बाद में तय करेगी। बहरहाल, दस अथवा इससे अधिक यात्रियों की क्षमता वाले वाहनों को छोड़कर अन्य वाहनों पर 15 प्रतिशत उपकर लगाया जायेगा। अधिकारी ने कहा कि 15 प्रतिशत की अधिकतम उपकर दर का मुआवजा विधेयक में जिक्र किया गया है। बहरहाल, जीएसटी व्यवस्था में प्रभावी कर दर उस व्यवस्था पर लगने वाली मौजूदा कर दर से ज्यादा नहीं होगी ऐसा प्रयास होगा, जिससे कि महंगाई नहीं बढ़े। ‘यह अधिकतम सीमा है, इतना अधिकार दिया गया है, हम 12 प्रतिशत तक ही लगा सकते हैं।

थोड़ी गुंजाईश

थोड़ी गुंजाईश

हमने कुछ गुंजाइश रखी है थोड़ी बहुत गुंजाइश रखी है।' जीएसटी परिषद ने जीएसटी व्यवस्था के तहत पंजीकरण, भुगतान, रिफंड, चालान और प्रतिफल से जुड़े नियमों के पांच सैट को पहले ही मंजूरी दे दी है। चार अन्य नियमों के सैट हैं जिन्हें औपचारिक मंजूरी दी जानी है

नियमों के सैट

नियमों के सैट

जेटली ने कहा चार अन्य नियमों के सैट हैं जिन्हें औपचारिक मंजूरी दी जानी है। इनमें --संयोजन, मूल्यांकन, इनपुट टैक्स क्रेडिट और परिवर्तन-- शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के जिन पांच सैट को पहले मंजूरी दी गई है उनमें विधेयकों के अनुरूप मामूली सुधार किया जाना है। अधिकारियों के समिति इस संबंध में अगले सप्ताहांत तक राज्यों को इन नियमों की जानकारी दे देगी।जीएसटी परिषद 31 मार्च को होने वाली अगली बैठक में इन नियमनों पर विचार एवं मंजूरी देगी।

31 मार्च के बाद तय होंगे नियम

31 मार्च के बाद तय होंगे नियम

उन्होंने कहा कि नियमों को मंजूरी मिलने के बाद किस वस्तु पर किस दर से कर लगेगा यह तय किया जायेगा। ‘एक बार यह काम हो जाये उसके बाद हम जीएसटी लागू करने के लिये तैयार होंगे। उम्मीद है कि 31 मार्च के बाद, जब नियमों को मंजूरी मिल जायेगी, विभिन्न वस्तुओं के लिये कर दर तय करने का काम शुरू हो जायेगा।

सही दिशा में चल रहा है काम

सही दिशा में चल रहा है काम

जेटली ने कहा कि इस लिहाज से हमारे पास समूची तैयारी करने और एक जुलाई से इसे लागू करने के बीच काफी समय है। उन्होंने कहा कि अब तक की प्रगति सही दिशा में चल रही है।

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