अमेरिकी सरकार ने भारत को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि H-1B वीजा नियमों को कड़ा करना उसकी प्राथमिकता में नहीं है।
भारतीय आईटी कंपनियों की H-1B वीजा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिकी सरकार ने भारत को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि H-1B वीजा नियमों को कड़ा करना उसकी प्राथमिकता में नहीं है। अमेरिका की ओर से यह भरोसा ऐसे वक्त में दिलाया गया है, जब वहां H-1B वीजा को लेकर कार्यकारी आदेश जारी किए जाने पर बहस चल रही है।
H-1B वीजा की प्रीमियम प्रॉसेसिंग सस्पेंड
इस बीच खबर यह है कि अमेरिका ने H-1B वीजा की प्रीमियम प्रॉसेसिंग को सस्पेंड कर दिया है। फिलहाल याचिकाकर्ता I-907 फॉर्म नहीं भर पाएंगे। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक 3 अप्रैल, 2017 से यूएससीआईएस ने सभी H-1B वीजा की प्रीमियम प्रॉसेसिंग को सस्पेंड कर दिया है। यह निलंबन 6 महीने तक के लिए है।
इमिग्रेशन के मुद्दे पर काम कर रहा है अमेरिका
विजिटिंग कॉमर्स सेक्रटरी रीता तेवतिया ने कहा, 'भारत के टेक सेक्टर का अमेरिका में योगदान महत्वपूर्ण है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि H-1B वीजा का मुद्दा प्रमुखता में नहीं है। इमिग्रेशन के मुद्दे पर अमेरिका काम कर रहा है। हर मुद्दा अपने आप में अलग है।'
वीजा नियमों सुधार लाने का प्रस्ताव
अमेरिका में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने H-1B और एल-1 वर्क वीजा में सुधार को लेकर एक विधेयक पेश किया है। इस विधेयक में विदेशी कंपनियों द्वारा H-1B वीजा नियमों के उल्लंघन पर रोक लगाने की प्रस्ताव है। विधेयक को पेश करने वाले सांसदों में भारतीय मूल के आर.ओ. खन्ना भी शामिल हैं। इससे पहले भी अमेरिकी संसद में ऐसे करीब आधा दर्जन विधेयक लंबित हैं।
भारतीय मूल के सीनेटर भी शामिल
H-1B वीजा और एल-1वीजा रिफॉर्म एक्ट 2017 को सांसद बिल पास्क्रेल, डेव ब्रैट, आर.ओ. खन्ना और पॉल गोसार ने पेश किया। इन सभी विधेयकों में H-1B और एल-1 वीजा प्रोग्राम्स में खामियों को दूर करने की मांग की गई है। इसके अलावा अमेरिकी कर्मचारियों और वीजा होल्डर्स को संरक्षण देने की भी मांग की गई है।
H-1B वीजा नॉन-इमीग्रेंट वीजा है
H-1B वीजा एक नॉन-इमीग्रेंट वीजा है जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी विशेषज्ञों को अपने यहां रख सकती हैं। इस वीजा के तहत टेक्नोलॉजी कंपनियां हर साल हजारों कर्मचारियों की भर्ती करती हैं। H-1B वीजा दक्ष पेशेवरों को दिया जाता है, वहीं एल1 वीजा किसी कंपनी के कर्मचारी के अमेरिका ट्रांसफर होने पर दिया जाता है। दोनों ही वीजा का भारतीय कंपनियां खूब इस्तेमाल करती हैं।
लाखों भारतीय करते हैं आवेदन
2016 में 2.36 लाख लोगों ने H-1B वीजा के लिए अप्लाई किया था जिसके चलते लॉटरी से वीजा दिया गया। अमेरिका हर साल 85 हजार लोगों को H-1B वीजा देता है।
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