भारतीय रिजर्व बैंक FDI प्रस्तावों को मंजूरी के लिये मंत्रालयों के लिए मानक प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर सकता है। सरकार ने एफआईपीबी को समाप्त करने का निर्णय किया है और इसके बाद अब प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रस्तावों पर निर्णय संबंधित मंत्रालय ही करेंगे। संवेदनशील क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मंजूरी के लिये नियम स्थापित करने के प्रस्ताव पर हाल में अंतर-मंत्रालयी बैठक में चर्चा हुई। फिलहाल यह सरकार की मंजूरी के अंतर्गत आता है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में कई विकल्पों पर चर्चा हुई। व्यापार सुगमता में और सुधार लाने के लिये सरकार ने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड समाप्त करने और विदेशी निवेश प्रस्तावों की शीघ्रता से मंजूरी के लिये एक नई व्यवस्था गठित करने का निर्णय किया है।
एफआईपीबी को समाप्त करने पर FDI प्रस्तावों को मंजूरी अब मंत्रालय और संबंधित नियामकीय प्राधिकरण के पाले में होगी।सूत्रों के अनुसार अंतर-मंत्रालयी समिति ने FDI प्रस्तावों को मंजूरी के साथ लाइसेंस देने की संभावना पर भी चर्चा की।
रक्षा और दूरसंचार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जिन कंपनियों के पास लाइसेंस होगा, वे ही विदेशी निवेश की मंजूरी मांग सकते हैं।दूरसंचार मंत्रालय का उदाहरण देते हुए सूत्रों ने कहा कि सरकार FDI प्रस्तावों को मंजूरी देने की शक्ति उसी मंत्रालय को दे सकती है।
उसने कहा, 'रिजर्व बैंक से प्रत्येक मंत्रालया के लिये मानक परिचालन नियाम तैयार करने का अनुरोध किया जा सकता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश से FDI प्रस्तावों पर विचार करके उस पर सुझाव देने का काम गृह मंत्रालय को मिल सकता है।'
सरकार ने एक समिति गठित की है, जो इन मुद्दों पर विचार कर रही है। इसमें रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय, औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग और गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि हैं। समिति दो महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है।


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