बजट में हो सकते हैं ये 10 बड़े एलान, मिडिल क्लास को होगा बड़ा फायदा

देश के इतिहास में पहली बार आम बजट और रेल बजट एक साथ पेश हो रहा है। वित्तमंत्री अरुण जेटली बजट पेश करने के लिए संसद पहुंच चुके हैं।

देश के इतिहास में पहली बार आम बजट और रेल बजट एक साथ पेश हो रहा है। वित्तमंत्री अरुण जेटली बजट पेश करने के लिए संसद पहुंच चुके हैं। इससे पहले ये आशंका थी कि सांसद ई अहमद के निधन से शायद बजट एक दिन के लिए टल जाए, पर ऐसा नहीं हुआ। बजट अब से कुछ देर बाद पेश होगा, पेश होने वाले बजट को लेकर क्या है संभावनाएं आगे 10 प्रमुख बिंदुओं में इसके बारे में पढ़ें।

बजट में किसानों पर खास ध्यान

बजट में किसानों पर खास ध्यान

बजट में उम्मीद है कि फसलों के एकीकृत राष्ट्रीय बाजार के विस्तार करने की योजना पेश की जाएगी जिससे किसानों को अपनी पैदावार बेहतर कीमत पर बेचने में मदद मिले। कर्ज नहीं लेने वाले किसान राष्ट्रीय फसल बीमा योजना में भाग ले सके, ये सुनिश्चित करने का काम किया जाएगा। खाद और बीज पर सब्सिडी बढ़ायी जा सकती है, वहीं मिट्टी की पड़ताल को लेकर विशेष योजना का ऐलान हो सकता है। सरकार के रूख को देखते हुए कर्ज माफी जैसी योजना तो शायद नहीं आएगी, हां, ब्याज में रियायत की बात की जा सकती है।

मनरेगा का बढ़ सकता है बजट

मनरेगा का बढ़ सकता है बजट

किसानों के साथ-साथ गरीबों के लिए सरकार इस बार आवंटन बढ़ा सकती है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के तहत आवंटन 43500 करोड़ रुपए से बढ़ाकर कम से कम 50 हजार करोड़ रुपए की जा सकती है

टैक्स पेयर की उम्मीदें

टैक्स पेयर की उम्मीदें

अनुमान है कि इस साल बजट में कर योग्य आमदनी की निचली सीमा यानी स्लैब 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 3 लाख या फिर 3.5 तीन लाख रुपए तक किया जा सकता है। ऐसा हुआ तो हर स्लैब में आयकर चुकाने वाले को 5 हजार एक सौ पचास रुपए से 10 हजार तीन सौ रुपए तक की बचत हो सकती है।

होम लोन में मिलेगी छूट

होम लोन में मिलेगी छूट

बजट में इस बार आयकर दाता होम लोन से भी ज्यादा रकम बचा पाएंगे। पूरी संभावना है कि इस बार वित्त मंत्री अरुण जेटली होम लोन में राहत का एलान करें। हाउंसिग सेक्टर मंदी से जूझ रहा है। अगर हाउसिंग में खरीदारी बढ़ी तो एक साथ कई उद्योगों को फायदा मिलता है और बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनते हैं। इससे पूरी अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। इसी को ध्यान मे रखते हुए ब्याज की रकम पर छूट दो से बढ़ा कर ढ़ाई लाख रुपए की जा सकती है। फिलहाल होम लोन लेने वाले की 2 लाख रुपए तक की आमदनी टैक्स फ्री हो जाती है। इसमें कल कुछ शर्तों के साथ पचास हजार का इजाफा देखने को मिल सकता है।

भत्ते में मिल सकती है छूट

भत्ते में मिल सकती है छूट

मिडिल क्लास के लिए वित्तमंत्री एक और तोहफा लेकर आ सकते हैं। तीसरी बड़ी छूट धारा 80 सी के अंदर देखने को मिल सकती है। ये छूट दो लाख रुपए तक हो सकती है। फिलहाल ये छूट सिर्फ डेढ़ लाख रुपए है। यानी हर स्लैब को पचास हजार टैक्स फ्री इनकम का फायदा हो सकता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली शिक्षा और परिवहन जैसे भत्तों की सीमा में बढ़ोतरी का रास्ता भी अपना सकते हैं। कर छूट के लिए स्कूल ट्यूशन फीस की सालाना सीमा 2400 रुपए और हॉस्टल फीस की सालाना सीमा 7200 रुपए से बढ़ायी जा सकती है। इसी तरह घर से दफ्तर आने-जाने के लिए सालाना 19200 रुपए खर्च पर कर में छूट मिलती है। इस सीमा में भी बढ़ोतरी मुमकिन है।

 बढ़ सकता है सर्विस टैक्स

बढ़ सकता है सर्विस टैक्स

देश भर को एक बाजार बनाने वाली नयी कर व्यवस्था वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी को पहली जुलाई से लागू किया जाना है। संकेत है कि इसमें सर्विस कर की दर 17-18 फीसदी तक जा सकती है। इसी को देखते हुए सर्विस कर की दर बढ़ायी जा सकती है।अभी सर्विस कर की मौजूदा दर 14 फीसदी है जिस पर आधे-आधे फीसदी की दर से स्वच्छता और किसान कल्याण सेस लगाया जाता है। इससे सर्विस कर की प्रभावी दर 15 फीसदी हो जाती है। सर्विस कर की दर बढ़ने से शहर क्या, गांव ,क्या, हर तबके के लोगों की जेब ढीली होगी।

कैशलेस को लेकर क्या होगी घोषणा

कैशलेस को लेकर क्या होगी घोषणा

सरकार की कोशिश है कि अब अधिकतर लेनदेन डिजिटल माध्यमों से ही हों और नगद इस्तेमाल को हतोत्साहित किया जाए। नोटबंदी के बाद ऐसे उपायों को लेकर मुख्यमंत्रियों की समिति ने भी अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंप दी है और समिति को भरोसा है कि उनकी सिफारिशों का संज्ञान बजट लेगा। इसी के बाद आसार हैं कि बैंक से 50 हजार रुपए या ज्यादा की नकद निकासी पर टैक्स लगाया जा सकता है। तकनीकी भाषा में इसे बैंकिंग कैश ट्रांजैक्शन टैक्स यानी बीसीटीटी कहा जाता है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में कुछ वर्षों तक 20 हजार रुपए या उससे ज्यादा निकालने पर बीसीटीटी का प्रावधान था, जिसे बाद में हटा लिया गया।

यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम

यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम

गरीबी रेखा से नीचे मौजूद लोगों के लिए सरकार एक नई योजना भी लांच कर सकती है। योजना का नाम यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम है। इस स्कीम के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को हर महीने एक निश्चित रकम मसलन 1200-1400 रुपए दिए जा सकते हैं। इस बारे में आर्थिक सर्वे में चर्चा की ही गयी है, अब यदि एक साथ पूरे देश मे नहीं भी लागू की जाती है तो देश के चुनिंदा जिलो में बतौर पायलट शुरु करने का ऐलान तो हो ही सकता है।

उद्योग जगत के लिए अच्छी खबर की उम्मीद

उद्योग जगत के लिए अच्छी खबर की उम्मीद

बजट से उम्मीद है कि बड़े उद्योगों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी से घटाने की बड़ी पहल होगी। 2015-16 के बजट में कहा जा चुका था कि चार सालों में कॉरपोरेट टैक्स की दर को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किया जाएगा। इस सिलसिले में 2016-17 के बजट में नयी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए कुछ शर्तो के साथ 25 फीसदी और 5 करोड़ रुपए से कम कमाई करने वालों यूनिट के लिए 29 फीसदी की दर से टैक्स लगाने का प्रस्ताव हुआ था।

छोटे उद्योगों के लिए क्या होगा बजट में

छोटे उद्योगों के लिए क्या होगा बजट में

उम्मीद है कि बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का दायरा बढ़ाकर एमएसएमई के सभी कामगारों को शामिल किया जाएगा। अभी सिर्फ गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को इसका फायदा मिलता है। छोटे उद्योगों के लिए वर्किंग कैपिटल लोन लेना और आसान बनाने का एलान किया जा सकता है।

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