अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में H1-B वीजा से संबंधित एक नया विधेयक पेश किया गया है। इसके तहत न्यूनतम 1,30,000 डॉलर वेतन वाली नौकरियों के लिए ही ऐसा वीजा दिया जा सकता है। यह मौजूदा न्यूनतम वेतन स्तर के दो गुना से भी ज्यादा है और इसके लागू होने पर अमेरिकी कंपनियों के लिए अमेरिका में भारत सहित विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देना मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिका फर्स्ट की नीति
यह पहल डोनाल्ड ट्रंप सरकार की अमेरिकियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की पहल का हिस्सा है। कैलिफोर्निया के सांसद जोए लोफग्रेन ने हाई-स्किल्ड इंटग्रिटी एंड फेयरनेस एक्ट-2017 (उच्च कुशल निष्ठा एवं निष्पक्षता अधिनियम-2017) नाम से यह विधेयक पेश किया। इसमें उन कंपनियों को वीजा देने में प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है जो बाजार औसत का दो गुना वेतन देने को तैयार हों। इसमें न्यूनतम भुगतान की श्रेणी को खत्म करने और H1-B वीजा पर आने वालों के लिए वेतन का स्तर बढ़ाने का प्रावधान है।
भारत की प्रतिक्रिया
इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने H-1B वीजा के मुद्दे पर कहा है कि भारत के हितों और चिंताओं से अमेरिकी प्रशासन और अमेरिकी कांग्रेस दोनों के वरिष्ठ स्तरों को अवगत करा दिया गया है।
क्या है H-1B वीजा
H-1B वीजा एक नॉन-इमीग्रेंट वीजा है जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी एक्सपर्ट्स को अपने यहां रख सकती हैं। H-1B वीजा के तहत टेक्नोलॉजी कंपनियां हर साल हजारों कर्मचारियों की भर्ती करती हैं। H-1B वीजा दक्ष पेशेवरों को दिया जाता है, वहीं L1 वीजा किसी कंपनी के कर्मचारी के अमेरिका ट्रांसफर होने पर दिया जाता है। दोनों ही वीजा का भारतीय कंपनियां जमकर इस्तेमाल करती हैं।
क्या होगा असर
एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 86% भारतीयों को H-1B वीजा कंप्यूटर और 46.5% को इंजीनियरिंग पोजीशन के लिए दिया गया है। 2016 में 2.36 लाख लोगों ने H-1B वीजा के लिए अप्लाई किया था जिसके चलते लॉटरी से वीजा दिया गया। अमेरिका हर साल 85 हजार लोगों को H-1B वीजा देता है। इनमें से करीब 20 हजार अमेरिकी विश्वविद्यालयो में मास्टर्स डिग्री करने वाले स्टूडेंट्स को जारी किए जाते हैं।
कंपनियों के लिए नियम
इसमें H1-B वीजा का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए ‘स्थानीय नौकरी का प्रतिस्थापन नहीं होने' के प्रमाण पत्र से छूट के लिए शर्त है कि ऐसे वीजा पर बुलाए जाने वाले कर्मचारी को 1,30,000 डॉलर से अधिक के वतन पर नहीं बुलाया जाएगा। यह 1989 में स्थापित H1-B वीजा के तहत वर्तमान न्यूनतम वेतन 60,000 डॉलर के वेतन स्तर के दुगने से भी ज्यादा है।
अमेरिकियों को मिले नौकरी
लोफग्रेन ने कहा, ‘मेरा विधेयक H1-B वीजा की दुनियाभर से सर्वश्रेष्ठ और उदीयमान को चुनने की मूल मंशा पर फिर से ध्यान केंद्रित करता है। साथ ही अमेरिका के कार्यबल में उच्च दक्षता, योग्यता, उच्च वेतनमान और उच्च कुशलता से परिपूर्ण कर्मचारियों को जोड़ें जो अमेरिका में नौकरियां पैदा करने में मदद करें ना कि उन्हें नौकरियों से विस्थापित करे।'
अमेरिका में आएगा इंस्पेक्टर राज
माना जा रहा है कि ट्रंप सरकार के इस कदम से न केवल H1-B और L1 वीजा पर शिकंजा कसेगा बल्कि इससे इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा। इससे संबंधित राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश के मसौदे के अनुसार नयी व्यवस्था में H1-B वीजा पर आने वाले व्यक्तियों के जीवनसाथी के लिए अमेरिका में काम करने की अनुमति भी खत्म हो जाएगी। जीवनसाथी को काम करने का अधिकार देने वाले वीजा की शुरुआत बराक ओबामा की सरकार ने हाल ही में ही की थी।
व्हाइट हाउस का बयान
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने अपनी दैनिक प्रेसवार्ता में कहा, ‘मेरे हिसाब से जहां तक H1-B और अन्य वीजा की बात है यह व्यापक आव्रजन सुधारों का हिस्सा है। राष्ट्रपति अपने कार्यकारी आदेशों के माध्यम और कांग्रेस के साथ काम करते हुए इनके बारे में बात करना जारी रखेंगे।'


Click it and Unblock the Notifications