रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने संकेत दिया कि आगामी बजट में रेलवे सेफ्टी फंड की घोषणा की जा सकती है। इस फंड के जरिए कोशिश की जाएगी कि भारतीय रेल को जीरो एक्सीडेंट रेल बनाया जाए।
रेल बजट का आम बजट में विलय कर देने के बाद अब इस बार के बजट में सभी कि निगाहें रेलवे के लिए होने वाली घोषणाओं पर टिकी रहेंगी। वित्तमंत्री अरुण जेटली के कंधो पर रेल और आम बजट दोनों का भार है। हाल ही में हुई रेल दुर्घटनाओं से रेलवे की सुरक्षा प्रणाली पर प्रश्न खड़े हुए हैं। ऐसे में इस बजट में अरुण जेटली का पूरा फोकस रेलवे के विस्तार से अलग उसकी सुरक्षा और सुविधा पर केंद्रित रहेगा।
रेल सेफ्टी फंड की हो सकती है घोषणा
हिंदी समाचार चैनल आजतक के एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने संकेत दिया कि आगामी बजट में रेलवे सेफ्टी फंड की घोषणा की जा सकती है। इस फंड के जरिए कोशिश की जाएगी कि भारतीय रेल को जीरो एक्सीडेंट रेल बनाया जाए। सिन्हा के मुताबिक यह कदम NDA की पिछली सरकार के समय भी उठाया गया था लेकिन उसके बाद मनमोहन सरकार में सेफ्टी फंड का मुद्दा ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
1 लाख करोड़ से अधिक होगा रेलवे फंड
रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि रेलवे की दिक्कत नई नहीं है। जब से देश में रेल शुरू हुई है तब से उसकी दिक्कतें भी पैदा हो रही है। जहां आजादी के बाद रेल यात्री में 20 गुना और रेल माल ढुलाई में 9 गुना इजाफा दर्ज हुआ है वहीं इन 70 साल के दौरान रेल नेटवर्क में महज 1.5 गुना वृद्धि हुई है। यही भारतीय रेल की सबसे बड़ी समस्या है। जहां पहले की सरकारें रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 40-50 हजार करोड़ रुपए तक खर्च करती थी वहीं मोदी सरकार ने पिछले साल एक लाख करोड़ रुपए का रेलवे बजट का प्रावधान किया था। आगामी बजट में भी उम्मीद है कि केन्द्र सरकार एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रकम रेलवे को मजबूत करने के लिए प्रावधान करेगी।
मालगाड़ियों के लिए भी जारी होगा टाइम टेबल
आगामी बजट में रेलवे को मजबूत करने के लिए सरकार कोशिश करेगी कि देश में यात्री गाड़ियों की तर्ज पर ही मालगाड़ियों को भी टाइम टेबल पर चलाए। वहीं रेलवे रूट के कंजेशन पर बोलते हुए सिंहा ने कहा कि देश में जिस रूट पर 100 गाड़ियां चलनी चाहिए उसपर मौजूदा समय में 150-160 गाड़ियां चलाई जा रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए रेलवे तेजी के साथ डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण करा रही है। सिन्हा ने बताया कि 2019 तक इस काम को पूरा कर लिया जाएगा जिसके बाद देश में रेल की रफ्तार को बढ़ाने और रूट से कंजेशन को कम करने में मदद मिलेगी।
और डबल डेकर ट्रेने चलेंगी
सिन्हा ने बताया कि आगामी बजट में डबल डेकर ट्रेन के साथ साथ रेलवे के सुचारू रूप से चलने के लिए रेलवे बोर्ड के काम-काज का विकेन्द्रीकरण करने पर अहम घोषणा की जा सकती है।
आतंकियों के निशाने पर रेलवे!
मनोज सिन्हा ने बताया कि बीते दिनों में देखने को मिला है कि रेलवे आतंकवादियों के लिए सॉफ्ट टार्गेट रहा है। इसके लिए केन्द्र सरकार ने रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स को मजबूत करने के कई कदम उठाए हैं। सिन्हा के मुताबिक बिना सुरक्षा के रेलवे की रफ्तार बढ़ाने का काम नहीं किया जा सकता।


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