घरेलू रेटिंग एजेंसी आईसीआरए का यह कहना है कि केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) द्वारा जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अग्रिम अनुमान में गंभीर गलतियां हैं
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) द्वारा जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अग्रिम अनुमान में गंभीर गलतियां हैं, क्योंकि इसमें नोटबंदी के बाद के महीनों का आंकड़ा ही शामिल नहीं है। घरेलू रेटिंग एजेंसी आईसीआरए का यह कहना है। एजेंसी ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2016-17 के लिए जीडीपी के 6.8 फीसदी रहने का पूर्वानुमान लगाया है।

आईसीआरए ने एक बयान में कहा, "2016 के मध्य नबंवर में नोटबंदी के बाद से अर्थव्यवस्था पर जो असर पड़ा है। उसे साल भर के अनुमान में शामिल करना बेहद जरूरी है। क्योंकि नोटबंदी से नकदी पर निर्भर क्षेत्रों जैसे निर्माण क्षेत्र आदि को काफी नुकसान पहुंचा है।"
इसमें कहा गया कि सीएसओ द्वारा जारी आंकड़े आश्चर्यजनक हैं, क्योंकि उन्होंने केवल पहली छमाही के आंकड़ों के आधार पर ही यह निष्कर्ष निकाला है। सीएसओ ने देश के जीडीपी की वृद्धि दर के वित्त वर्ष 2016-17 में 7.1 फीसदी रहने का पूर्वानुमान लगाया है, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में यह 7.6 फीसदी थी।
सीएसओ के अनुमान के मुताबिक वास्तविक जीवीए का अनुमानित विकास दर समीक्षाधीन वित्त वर्ष में 7 फीसदी रहेगी, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में यह 7.2 फीसदी थी। आईसीआरए ने कहा, "हालांकि हमारी उम्मीद है कि जीडीपी और जीवीए की वित्त वर्ष 2017 में वृद्धि दर क्रमश: 6.8 फीसदी और 6.6 फीसदी रहेगी। जोकि पहले के लगाए गए अनुमान से कम है।"
सीएसओ ने जीडीपी का अनुमान वित्त वर्ष 2016-17 के लिए 7.1 फीसदी लगाया है जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में यह 7.6 फीसदी था।


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