इस सूची में स्वास्थ्य, विनिर्माण, खेल और वित्त जैसे 20 उद्योग क्षेत्रों के 30 दुनिया बदलने वाले लोग शामिल हैं। इस सूची में भारतीय मूल के 30 पुरुष और महिलाएं शामिल हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में विशिष्
प्रतिष्ठित फोर्ब्स पत्रिका की 2017 की 'सुपर अचीवर्स' की सूची में भारतीय मूल के 30 नवोन्मेषक और उद्यमियों ने स्थान बनाया है। ये वे लोग हैं जिनकी उम्र 30 वर्ष से कम है और विश्व एवं यथास्थिति को बदलने में यकीन रखते हैं।

इस सूची को समाचार पोर्टल जी न्यूज ने एक एजेंसी के हवाले से प्रकाशित किया है। इस सूची में स्वास्थ्य, विनिर्माण, खेल और वित्त जैसे 20 उद्योग क्षेत्रों के 30 दुनिया बदलने वाले लोग शामिल हैं। इस सूची में भारतीय मूल के 30 पुरुष और महिलाएं शामिल हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में विशिष्ट पहचान कायम की है। सूची में कुल 600 ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिन्होंने 'पारंपरिक सोच को चुनौती दी और उद्यमियों, मनोरंजकों और शिक्षाविदों की नयी पीढ़ी के नियमों को फिर से लिखा है। इनमें कुछ कर गुजरने का जुनून है और इन्हें अच्छे कारणों के लिए तैयार किया जा सकता है। इनका लक्ष्य और कुछ नहीं बस यथास्थिति को तोड़ना और दुनिया को बदलना है।
इस सूची में नियो लाइट के सह-संस्थापक 27 वर्षीय विवेक कोप्पार्थी का नाम शामिल है जिन्होंने पीलिया रोग में घर पर इस्तेमाल करने में सक्षम एक छोटा प्रकाश-चिकित्सा उपकरण विकसित किया है। इसके अलावा कंपनी शिशुओं में लू के इलाज के लिए एक और उपकरण बनाने पर काम कर रही है। इसी सूची में 27 वर्षीय प्रार्थना देसाई का भी नाम है जिन्होंने हावर्ड विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई को बीच में इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वह विकासशील देशों में ड्रोन की मदद से लोगों का इलाज करने के लिए एक कार्यक्रम चलाना चाहती थीं।
स्वास्थ्य क्षेत्र की कंपनी जिप्लिन में उन्होंने रवांडा देश में ड्रोन के माध्यम से दवाएं सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है। फोर्ब्स की इस सूची में 28 वर्षीय शॉन पटेल का भी नाम है। उन्होंने हावर्ड में अपनी पढ़ाई के दौरान शल्य चिकित्सा पर दर्जनों जर्नल प्रकाशित करवाए। उनकी कंपनी ऑथरे निंजा का मकसद चिकित्सकों के बीच आपस में संवाद स्थापित करने को आसान बनाना है। इसके लिए वे एक मोबाइल एप बना रहे हैं।
इसी प्रकार सूची में शामिल 17 वर्षीय रोहन सूरी अवेरिया हेल्थ सॉल्युशंस के संस्थापक हैं। उन्होंने मस्तिष्काघात परीक्षण को बेहतर बनाने की एक प्रणाली विकसित की है। किसानों के लिए काम करने वाले 23 वर्षीय आदित्य अग्रवाल को भी इस सूची में शामिल किया गया है। 'किसान नेटवर्क' के सह-संस्थापक अग्रवाल ने प्रिंसटन विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। किसान नेटवर्क भारत के छोटे किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस उपलब्ध कराता है। इसके अलावा कई और भारतीय मूल के उद्यमियों को इसमें शामिल किया गया है।
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