राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के मुताबिक सांप और कुत्ते की तरह मच्छर के भी काटने से हुई मौत दुर्घटना ही मानी जाएगी।
आप सुनकर चौंक सकते हैं लेकिन कानूनी भाषा में ये तर्क बिल्कुल सही है। बीमा धारकों से जुड़े विवाद का निवारण करने वाले आयोग राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा है कि मच्छर काटने से हुए मलेरिया या डेंगू के शिकार व्यक्ति की मौत एक दुर्घटना है।
आयोग के न्यायमूर्ति वीके जैन ने कहा कि हमारे लिए ये स्वीकार करना मुश्किल है कि मच्छर के काटने की वजह से हुई मौत दुर्घटना से हुई मौत नहीं है। उन्होंने कहा कि इसपर विवाद हो सकता है लेकिन मच्छर का काटना ऐसी चीज है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं होती है और यह अचानक हो जाता है। आयोग ने आगे कहा कि, बीमा कंपनी की वेबसाइट पर सूचना के अनुसार दुर्घटना में सांप काटना और कुत्ते का कटना और ठंड से मौत जैसी घटनाएं शामिल हैं ऐसे में ये दलील मानना मुश्किल है कि कि मच्छर के काटने से हुई मौत बीमारी है ना कि दुर्घटना। आयोग के मुताबिक सांप और कुत्ते की तरह मच्छर के भी काटने से हुई मौत दुर्घटना ही मानी जाएगी। आपको बता दें कि मौसमी भट्टाचार्य नामक महिला ने अपने पति की मौत पर बीमा दावा किया था। मौसमी के पति देबाशीष की मौत 2012 में मलेरिया से हो गई थी। जिसके बाद मौसमी ने बीमा क्लेम किया था। मौसमी के पति देबाशीष ने बैंक ऑफ बड़ौदा से होम लोन लिया था और नेशनल इंश्योरेंश कंपनी से पॉलिसी ली थी। देबाशीष की मौत के बाद जब मौसमी होम लोन खत्म करवाने कंपनी के पास पहुंची तो कंपनी ने उनका क्लेम खारिज कर दिया। जिसके बाद मौसमी ने 2014 में बंगाल के जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत की थी, जहां अपील खारिज कर दी गई थी, जिसके बाग मौसमी ने नेशनल कंज्यूमर कमीशन का रुख किया था। अब मौसमी के पक्ष में फैसला आया है।
क्या कहा आयोग ने
मच्छर का काटना है दुर्घटना
क्या था मामला
किसके पक्ष में आया फैसला


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