शशिकांत दास ने नए नोट के बारे में कहा कि ये अबतक के सबसे ज्यादा हाईसिक्योरिटी फीचर से लैस नोट हैं।
पिछले दिनों रेडियोएक्टिव स्याही को लेकर तमाम तरह की खबरें आई थीं जिसमें सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा किया था कि नए नोटों पर रेडियोएक्टिव स्याही लगी थी जिससे आयकर विभाग के अधिकारी सही जगह पर सही समय पर छापा मार रहे हैं।
किसी भी कंपोनेंट को बना सकते हैं रेडियोएक्टिव
अब इस नोट पर लगी रेडियोएक्टिव स्याही का पूरा सच सामने आया है। समाचार चैनल ABP न्यूज ने अपने शो वायरल सच में नोट पर रेडियोएक्टिव स्याही लगे होने के बारे में पूरी पड़ताल की। समाचार चैनल ABP न्यूज ने न्यूक्लियर साइंटिस्ट डॉक्टर एसपी लोचब के हवाले से लिखा है स्याही में किसी भी कम्पोनेंट को रेडियोएक्टिव बना सकते है और उसके रेडियोएक्टिव कह सकते है, दूसरी बात ये कि अगर उसमें ट्रेस एलिमेंट है तो माइक्रो-माइक्रो ग्राम की मात्रा आती है जो की जो बहुत ज्यादा संवेदी यंत्रों से भी ट्रेस नहीं हो सकते हैं।
रेडियोएक्टिव कणो को ट्रेस करना मुश्किल
उन्होंने बताया कि ऐसा मान लिया जाए कि 2000 रुपए के नोट पर रेडियोएक्टिव स्याही लगी है फिर भी उसके कण इतने सूक्ष्म हैं कि उसे किसी भी तरह के आधुनिक रेडियोएक्टिव सेंसर के जरिए खोजा नहीं जा सकता है। यहां तक की अगर नोटों की मात्रा बहुत ज्यादा है फिर भी ऐसे नोटों को ट्रेस नहीं कर सकते हैं।
अफवाह है नोट पर रेडियोएक्टिव स्याही की खबर
इसके अलावा यह भी अफवाह थी कि नोट में किसी तरह की चिप लगी हुई है जिससे नोट को ट्रेस किया जा सकता है। इस अफवाह को भी सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। वित्तसचिव शशिकांत दास ने नोट में चिप लगे होने की किसी भी बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। हालांकि उन्होंने अपने बयान में ये जरूर कहा कि ये अबतक के सबसे ज्यादा हाईसिक्योरिटी फीचर से लैस नोट हैं।
अफवाहों पर ना दे ध्यान
अब दोनों ही बातें अफवाह साबित हो गई हैं। नोट में ना तो किसी तरह की कोई रेडियोएक्टिव स्याही और ना ही किसी तरह की कोई चिप है। आयकर विभाग अपने पुराने तरीकों से ही जालसाजों को दबोच रहा है।


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