निया के पांच बड़े देश हैं जो कैशलेस हैं, आप भी कैशलेस बनिए और छूट पाइए ऑनलाइन मोबाइल वॉलेट के फ्री कूपन्स पर।
कैशलेस शब्द इन दिनों काफी फेमस हो चुका है। टीवी पर बात-चीत में या फिर सोशल मीडिया पर 'कैशलेश' शब्द काफी ट्रेंड कर रहा है। ये सोचकर भी आश्चर्य होता है कि बिना कैश के आखिर हमारा समाज कैसा दिखेगा। वर्तमान में हम न्यूज पेपर का बिल पेमेंट करने से लेकर अन्य छोटे बिल पेमेंट्स के लिए ऑनलाइन मोबाइल वॉलेट का प्रयोग कर रहे हैं। लोगों के बीच ये मोबाइल वॉलेट भी लोकप्रिय हैं और लोग हार्ड कैश नहीं होने से ज्यादा परेशान भी नहीं है। यहां क्लिक करके आप पेटीएम, मोबीक्विक, फ्रीचार्ज के कूपन का लाभ ले सकते हैं। ये कूपन आपको इलेक्ट्रिसिटी बिल, वॉटर बिल, पोस्टपेड बिल के भुगतान पर छूट या कैशबैक का लाभ देंगे। आगे पढ़िए 5 देशों के बारे में जो इस वक्त बड़ी कैशलेस इकोनॉमी हैं।

सिंगापुर- इस देश काफी वक्त पहले ही कैशलेश प्रणाली को अपना लिया था। जिसका नतीजा ये हुआ कि वहां की एक बड़ी जनसंख्या कैशलेश लेन-देन करती है। सिंगापुर में 61% लोग कैशलेस भुगतान करते हैं।
नीदरलैंड्स- यूरोप का एक छोटा सा देश है नीदरलैंड्स लेकिन वहां पर कैशलेस लेन-देन का प्रतिशत काफी ज्यादा है। नीदरलैंड्स में तकरीबन 60% लोग कैशलेस लेन-देन करते हैं।
फ्रांस- फ्रांस भी कैशलेस इकोनॉमी है, यहां 59% से अधिक लोग कैशलेस लेन-देन करते हैं।
जर्मनी- अन्य देशों की तुलना में जर्मनी में ज्यादा कैशलेस लेन-देन नहीं होता है लेकिन, ये देश तेजी से कैशलेस इकोनॉमी बनने की तरफ बढ़ रहा है। जर्मनी में 33% कैशेलस लेन-देन होता है।
ऑस्ट्रेलिया- जर्मनी की तरह ऑस्ट्रेलिया भी कैशलेस लेन-देन की तरफ बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में 35% कैशेलस लेन-देन होता है।
तो, अगर आप इनमें से किसी भी देश में घूमने जा रहे हैं तो कैश की चिंता छोड़ दीजिए। आपके दैनिक जीवन की खर्चे इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (EFT) के जरिए ही पूरे हो जाएंगे।


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