बाजार में बुधवार को भी दिखी गिरावट

सेंसेक्स 6 अंक गिरावट के साथ 26299 पर बंद हुआ वहीं निफ्टी 8112 के स्तर पर बंद हुआ। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 300 अंक तेजी पर जबकि निफ्टी 8200 के स्तर से पार देखा गया।

पिछले दो दिनों से बाजार में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि बुधवार को बाजार संभला और महज 6 अंको की गिरावट के साथ बंद हुआ। देश में कैश की कमी और लोगों के ज्यादा कैश निकालने से सेंसेक्श में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 6 अंक गिरावट के साथ 26299 पर बंद हुआ वहीं निफ्टी 8112 के स्तर पर बंद हुआ। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 300 अंक तेजी पर जबकि निफ्टी 8200 के स्तर से पार देखा गया।

वहीं रुपए में भी मजबूती देखी गई। डॉलर के मुकाबले रुपया 67.61 पर खुला। मंगलवार को रुपया 67.74 के स्तर पर बंद हुआ था। 9 बजकर 58 मिनट पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 111 अंकों की तेजी के साथ 26415 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स निफ्टी 18 अंकों की तेजी के साथ 8127 के स्तर पर देखा गया।

मंगलवार को दिनभर गिरावट पर कारोबार करते शेयर बाजारों ने सेशन का अंत तगड़ी गिरावट पर किया। सेंसेक्स 514 अकों का गोता खाकर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी करीब पांच महीनों के निचले स्तर पर 8,108 पर सिमटा। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 26,809.61 के ऊपरी और 26,253.63 के निचले स्तर को छुआ।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के 14 महीने के निचले 4.20 प्रतिशत और थोक मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति के अक्टूबर में लगातार दूसरे महीने गिरावट के साथ 3.39 प्रतिशत के स्तर पर रहने के चलते अगले महीने रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ गई है। इसके अलावा एशियाई बाजारों में मजबूत रूख की वजह से भी बाजार उत्साहित रहा। इसके अलावा खुदरा मुद्रास्फीति अक्तूबर में गिरकर 14 महीने के निचले स्तर पर यानी 4.2 प्रतिशत पर रही जिस वजह से बाजार में सुधार देखा गया।

रियल्टी, सूचना प्रौद्योगिकी, तकनीकी, ऑटो, तेल एवं गैस और सार्वजनिक लोक उपक्रम क्षेत्र में सुधार के चलते शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1.20 प्रतिशत यानी 316.77 अंक सुधरकर 26621.40 अंक के स्तर पर पहुंच गया। गौरतलब है कि पिछले दो दिनों में सेंसेक्स में 1213.05 अंक तक गिर गया था।

वहीं रुपया डॉलर के मुकाबले 19 पैसे मजूबत होकर 67.55 के स्तर पर रहा। इसके पीछे अहम वजह बैंकों और निर्यातकों द्वारा डॉलर की ताजा बिक्री है। मुद्रा कारोबारियों के अनुसार अन्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में नरमी और घरेलू शेयर बाजारों के चढ़कर खुलने की वजह से रुपये में सुधार हुआ है।

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