भारत-पाकिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने हथियार कंपनियों को रेडी टू सप्लाइ मोड में रहने के लिए कहा है। भारत सरकार ने अपने हथियार आयात देशों से युद्ध की स्थिति में जल्द से जल्द हथियार सप्लाई करने और हथियारों का उत्पादन तेजी से बढ़ाने के लिए कहा है। सरकार ने हथियार कंपनियों को पहले ही आगाह करते हुए कहा कि उन्हें शॉर्ट नोटिस में तेजी से और ज्यादा हथियार सप्लाई करने पड़ सकता हैं।
शॉर्ट नोटिस पर हथियारों की हो सप्लाई
इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि हथियार सप्लायर्स को सेना की जरूरतों के हिसाब से अपनी क्षमता को परख लेना चाहिए। भारत दुनिया में हाथियारों का सबसे बड़ा आयातक है। इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबकि एक वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ ने बताया कि सरकार इंडस्ट्री की शॉर्ट नोटिस पर हथियारों की डिलेवरी करने की क्षमता की साफ तस्वीर चाहती है, ताकि मौजूद प्रोडक्शन बढ़ाया जा सके और जरूरी ऑर्डर तुरंत पूरे किए जा सकें।
पठानकोट हमले के बाद से तैयारी शुरू
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने पठानकोट हमले के बाद भी ऐसा ही कदम उठाया था और हथियार कंपनियों को अलर्ट मोड पर रहने के लिए कहा था। भारतीय सेना के लिए छोटे हथियारों और फिल्ड गन और आर्टिलरी के लिए गोला बारूद देश से ही मिल जाता है। भारी हथियारों मसलन फाइटर जेट और हैवित्जर तोप के लिए बाहर से हथियार आयात किया जाता है।
ताकि ना हो कोई परेशानी
इसके अलावा फाइटर जेट्स जिसमें सुखोई-30MKI और मिराज शामिल हैं के पुर्जे भी कम समय में सप्लाई करने पर जोर दिया गया है। आपको बता दें कि सर्जिकल स्ट्राइक से एक दिन पहले ही वित्तमंत्री अरुण जेटली ने रक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए रक्षा बजट बढ़ाने का फैसला किया था।
पूरी है तैयारी
इस वक्त भारत अपनी पूर्वी सीमा जो कि चीन से लगी है और पश्चिमी सीमा जो कि पाकिस्तान से लगी है, दोनों ही सीमाओं पर तेजी से सैन्यबल और हथियारों की आपूर्ति कर रहा है। छोटे हथियार और गोला बारूद की कितनी आपूर्ति हो रही है इसके बारे में किसी तरह की रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।
और मजबूत होगी वायुसेना
भारत ने हाल ही में फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट्स का सौदा किया है। ये सभी जेट रेडी टू फ्लाई कंडीशन में भारतीय वायुसेना को 2018 से पहले या 2018 तक मिल जाएंगे। इसके अलावा वायुसेना के सुखोई-30 MKI को भारत और रूस मिलकर सुपर सुखोई में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, साथ ही भारत और रूस मिलकर पांचवी पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट PAK-FA फाइटर जेट भी विकसित कर रहे हैं।
थलसेना की तैयारी भी पूरी
वायुसेना के अलावा थल सेना का लिए लंबे समय से अटकी आर्टिलरी यूनिट की मांग भी तेजी से पूरी हो रही है। देश में बनी 125 एमएम की तोप के अलावा अमेरिका के साथ हेवित्जर तोप को लेकर भी बात-चीत चल रही है। वहीं डीआरडीओ अर्जुन टैंक का एडवांस वर्जन भी तैयार कर रहा है जिसमें टैंक ग्राउंड टू ग्राउंड और ग्राउंड टू एयर कम्युनिकेशन पर काम चल रहा है। छोटे हथियारो में भारत ने हाल ही में 6 हजार एडवांस कॉम्बेक्ट राइफल की डील को रद्द कर दिया है अब ये राइफल भारत में ही मेक इन इंडिया स्कीम के तहत तैयार की जाएंगीं।
नौसेना को मिलेगी ताकत
इन सब के अलावा नौसेना भी अपनी ताकत बढ़ा रही है। एशिया में चीन के बाद भारतीय नौसेना ऐसी दूसरी नौसेना है जिसे ब्लू वॉटर नेवी का दर्जा मिला है। दुनिया के कुछ ही चुनिंदा देशों की नेवी को ब्लू वॉटर नेवी का दर्जा मिला है। नेवी फ्रिग्रेट्स और पनडुब्बियों की संख्या बढ़ाने के साथ उन्हें और भी एडवांस और लीथल बनाने पर जोर दे रही है।
भारत की रक्षा नीति में हो रहा है बदलाव
कुल मिलाकर भारत अपनी रक्षा नीति में डिफेंस से अफेंस मोड में आ गया है। पूरी तैयारी और सटीक जवाब के लिए तीनों सेनाएं भी तैयार हैं ऐसे मे सरकार पैसे की कमी या हथियारों की कमी के चलते सेना के हमले की धार कुंद नहीं करना चाहती है। इसीलिए सरकार ने हथियार सप्लाई करने वाली कंपनियों को युद्ध की स्थिति में हथियार तेजी से निर्यात करने के संकेत दे दिए हैं।


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