भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर नई ऊंचाई पर है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 30 सितंबर के दौरान बढ़कर 371.99 अरब डॉलर रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर तक यह भंडार 371.99 अरब डॉलर रहा, जबकि 23 सितंबर तक यह 370.76 अरब डॉलर था।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 30 सितंबर तक 346.71 अरब डॉलर, सोना 21.40 अरब डॉलर, स्पेशल ड्राइंग राइट्स 1.48 अरब डॉलर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भंडारण 2.38 अरब डॉलर रहा। देश में 23 सितंबर तक के विदेशी मुद्रा भंडार में 345.24 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, 21.64 अरब डॉलर का सोना, 1.49 अरब डॉलर का स्पेशल ड्राइंग राइट्स और आईएमएफ में भंडारण 2.39 अरब डॉलर था।
चीन का विदेशी मुद्रा भंडार घटा
वहीं चीन का विदेश मुद्रा भंडार घटा है। चीन का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार तीसरे महीने सितंबर में बाजार के अनुमानों से ज्यादा घटा है। चीन दुनिया की दूसरे सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है में से धन तेजी से बाहर निकलने का संकेत है। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार अगस्त के 3.185 लाख करोड़ डॉलर से घटकर सितंबर में 3.166 लाख करोड़ डॉलर रह गया।
युआन की वैल्यू गिरी
चीन का विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है। पिछले साल इसमें रिकॉर्ड 513 अरब डॉलर की कमी आई थी, जब बीजिंग ने युआन को डिवैल्यूड कर दिया था।
तो इस लिए बढ़ रहा है देश का विदेशी मुद्रा भंडार
हाल ही में उर्जित पटेल ने आरबीआई की कमान संभाली है। पटेल ने अपने पूर्वर्ती गवर्नर रघुराम राजन की नीतियों में किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं किया है। रघुराम राजन की नीति भी विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने की थी। रघुराम राजन के तीन वर्ष के कार्यकाल के दौरान देश में विदेशी मुद्रा भंडार 92 अरब डॉलर तक बढ़ा था। जानकारों का मानना है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार इसी वजह से बढ़ रहा क्योंकि उर्जित पटेल ने रघुराम राजन की नीतियों में कोई बदलाव नहीं किया है।


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