GST ने पार की पहली बाधा, केंद्र और राज्यों के बीच बनी सहमति

GST परिषद की बैठक के दूसरे दिन केंद्र व राज्‍यों के बीच कारोबारी छूट सीमा पर सहमति बन गई है। केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि बैठक में केंद्र और राज्‍यों के बीच थ्रेसहोल्‍ड लिमिट पर सहमति बन गई है। उन्‍होंने कहा कि GST के लिए कारोबार की छूट सीमा 20 लाख रुपए वार्षिक तय की गई है। इसका सीधा मतलब है कि जिन कारोबारियों की सालाना आय 20 लाख रुपए तक है, उन्‍हें GST के लिए रजिस्‍ट्रेशन नहीं कराना होगा।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में GST के लिए कारोबार छूट सीमा 10 लाख रुपए सालाना तय की गई है। बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन कंपनियों का सालाना टर्नओवर 20 लाख से 1.5 करोड़ रुपए के बीच है, उन पर लगने वाले GST का आंकलन राज्य सरकार के अधिकारी करेंगे। वहीं 1.5 करोड़ से ज्‍यादा के कारोबार वाले उद्योग दोहरे नियंत्रण की व्यवस्था में आएंगे।

बैठक में यह भी तय किया कि मुआवजा और GST दरें लागू होने के बाद राज्यों को होने वाले राजस्व में हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा देने का आधार वर्ष (बेस इयर) 2015-16 होगा। वित्‍त मंत्री ने कहा कि सभी उपकर GST में समाहित होंगे।

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि GST के लिए कारोबार की छूट सीमा 20 लाख रुपए तय की गई है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में GST के लिए कारोबार छूट सीमा 10 लाख रुपए तय की गई है। GST परिषद 17-19 अक्‍टूबर की बैठक में कर की दर और स्लैब को अंतिम रूप देगी। सभी उपकर GST में समाहित होंगे। सालाना 1.5 करोड़ से कम के कारोबार वाली इकाइयों के कर का आकलन राज्यों के दायरे में होंगी।

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