जम्मू-कश्मीर में सेना के बटालियन हेडक्वार्टर पर हुए हमले के बाद से देश में पाकिस्तान और सरकार के रवैए को लेकर आक्रामक प्रतिक्रिया आ रही है। हमले में अबतक 20 जवान शहीद हो चुके हैं वहीं घायल जवानों का इलाज जारी है। इस बीच एक बात मीडिया में लोगों के बीच से बार-बार बाहर आ रही है कि हमें इस हमले का मुंहतोड़ जवाब देते हुए पाकिस्तान पर हमला कर देना चाहिए। पर इससे अलग इस पूरे मुद्दे को देखने का एक आर्थिक दृष्टिकोण भी है।
आर्थिक रूप से तरक्की कर रहा है भारत
भारत वर्तमान में आर्थिक क्रांति के दौर से गुजर रहा है। देश में विदेशी निवेश बढ़ रहा है। एशिया के दो बड़े प्रतिद्वंदी चीन और जापान भारत में भारी निवेश कर रहे हैं। यूरोप और अमेरिका समेत खाड़ी के देशों से भारत के आर्थिक संबंध एतिहासिक रूप से मजबूत हो रहे हैं ऐसे में युद्ध का विकल्प अपनाने से देश की आर्थिक वृद्धि को बड़ा नुकसान हो सकता है।
किसे होगा ज्यादा नुकसान
अगर युद्ध की स्थिति आती है तो भारत और पाकिस्तान को आर्थिक नजरिए से क्या नुकसान पहुंचेगा, आर्थिक रुप से इस युद्ध के कारण क्या दूरगामी परिणाम निकलेंगे, इन तमाम बातों पर देश में बहस शुरु हो चुकी है। हम आपको बताएंगे कि अगर युद्ध हुआ तो किसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा।
अर्थ व्यवस्था की रफ्तार पड़ेगी सुस्त
यदि युद्ध की स्थिति आती है तो देश में अर्थ व्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। यदि युद्ध हुआ तो भारत में निवेश करने वाली तमाम विदेशी कंपनियां और विदेश निवेशक बाजार से अधिक से अधिक अपना पैसा निकाल सकते हैं जिससे बाजार में गिरावट आ सकती है। वहीं कमजोर पाकिस्तानी अर्थ व्यवस्था युद्ध की स्थिति में धराशायी हो सकती है। आर्थिक संकट से पाकिस्तान और उसकी सेना कमजोर पड़ सकती है जिसका फायदा भारत को मिल सकता है।
FDI पर पड़ेगा नकारात्मक असर
अगर युद्ध की स्थिति आती है तो भारत में विदेशी निवेश पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारत में निवेश करने वाली तमाम विदेशी कंपनियां कुछ दिनों के लिए ये निवेश टाल सकती हैं या खारिज कर सकती हैं ऐसे में देश की अर्थ व्यवस्था को मिलने वाली गति धीमी पड़ जाएगी जिसका खामियाजा भारत को उठाना पड़ सकता है। हालांकि ये नुकसान ऐसा नहीं होगा जिसका पाकिस्तान फायदा उठा सके।
चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर का नुकसान
अगर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति बनी तो पाकिस्तान को सबसे बड़ा नुकसान चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कारिडोर में हो सकता है। चीन ने इसके लिए 46 अरब डॉलर का निवेश किया है। युद्ध की स्थिति में चीन काम बंद कर सकता है जिसका नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ सकता है। चीन पाकिस्तान कॉरिडोर पाकिस्तान और चीन दोनों की ही बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना है।
एक नजर भारत और पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था पर
भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई अर्थ व्यवस्था है। तमाम बड़े देशों की निगाहें भारत पर टिकी हुई हैं। वहीं पाकिस्तान भारत के मुकाबले बेहद कमजोर है। भारत और पाकिस्तान आर्थिक मोर्चे पर से कितने मजबूत हैं इसके बारे में विस्तृत जानकारी आगे दी गई है-
जीडीपी
पाकिस्तान की मौजूदा जीडीपी की यदि बात करें तो वह वर्तमान में दुनिया की 41वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। पाकिस्तान की कुल जीडीपी 270 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। वहीं भारत दुनिया की 8वीं सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थ व्यवस्था है जबकि चीन दूसरे नंबर पर है।
प्रति व्यक्ति आय
प्रति व्यक्ति आय के मामले में पाकिस्तान की स्थिति थोड़ी बेहतर है। हालांकि पाकिस्तान की जनसंख्या भारत के मुकाबले बहुत कम है इसलिए प्रतिव्यक्ति आय का आंकड़ा भारत के प्रति व्यक्ति आय के आस-पास है। वर्तमान में पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय 1428.99 डॉलर है जबकि भारत की प्रति व्यक्ति आय 1581.59 डॉलर है वहीं चीन की प्रतिव्यक्ति आय 7924.65 डॉलर है।
विकास दर
पूरी दुनिया ये मान कर चल रही है कि आने वाला दशक भारत और चीन का होगा। दुनिया में एशियाई देशों का प्रभाव होगा। इसमें भारत, जापान, चीन, सिंगापुर, थाईलैंड जैसे देश हैं इसी फेहरिस्त में पाकिस्तान ने भी खुद को शामिल कर लिया है। जबकि सच्चाई ये है कि पाकिस्तान की विकास दर कई एशियाई देशों से नीचे है। वर्तमान में पाकिस्तान की विकासदर 5.54 फीसदी है। जबकि भारत की विकास दर 7.57 फीसदी है वहीं चीन भारत से पीछे है चीन की विकास दर 6.9 है।
बेरोजगारी
पाकिस्तान में बेरोजगारी एक बड़ा संकट है। पाकिस्तान में बहुत कम निवेश के कारण वहां बेरोजगारी बढ़ी है। पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था इस वक्त CPEC यानि चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर टिकी है। पाकिस्तान की वर्तमान बेरोगारी की दर 5.2 फीसदी है। भारत की वर्तमान बेरोजगारी की दर 3.6 फीसदी और चीन की 4.7 फीसदी है।
डॉलर की कीमत और गरीबी के आंकड़े
पाकिस्तानी रुपया एक कमजोर अर्थव्यवस्था की कमजोर रकम है। वर्तमान में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 104.61 रुपए है जबकि भारत में यही आंकड़ा गिरकर 66.73 रुपए पर आ जाता है और चीन में 6.63 युआन रह जाता है। पाकिस्तान की 29.5 फीसदी जनसंख्या इस वक्त गरीबी रेखा से नीचे गुजारा कर रही है वहीं भारत में यह आंकड़ा 21.9 फीसदी है। चीन की सरकार ने इस संबंध में किसी तरह का आंकड़ा नहीं जारी किया है।
सैन्य बजट
पाकिस्तान अपना रक्षा बजट भी भारी भरकम रखता है। पाकिस्तान का कुल सैन्य खर्च उसकी जीडीपी का 3.57 प्रतिशत है जबकि भारत में यह आंकड़ा घटकर 2.42 फीसदी है और चीन में घटकर 1.98 फीसदी रह जाता है।
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