हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काला धन या अघोषित संपत्ति रखने वाले लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह 30 सितंबर 2016 तक अपनी अघोषित संपत्ति का ब्यौरा आयकर विभाग को नहीं देते हैं तो वह कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
आखिरी मौका
आपको बता दें कि मोदी सरकार ने अघोषित संपत्ति रखने वाले लोगों के लिए योजना जारी की थी जिसके तहत वह अपनी अघोषित संपत्ति पर 40 फीसदी टैक्स चुका कर बच सकते थे, साथ ही उनका नाम भी गोपनीय रखा जाता।
आयकर विभाग की चेतावनी
30 सितंबर 2016 का दिन भारत में शायद काले धन की समाप्ति की शुरुआत के रूप में याद किया जाएगा। अघोषित संपत्ति या फिर काला धन रखने वाले लोगों के लिए 30 सितंबर 2016 आखिरी तारीख है। आयकर विभाग ने देश में अघोषित संपत्ति रखने वालों के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वह ऐसी संपत्ति की घोषणा जल्द करें। घरेलू स्तर पर कालेधन की जानकारी देने के लिए शुरू की गई आयकर खुलासा योजना (आईडीएस) बंद होने में 3 सप्ताह से कम का ही वक्त बचा है।
बनी रहेगी गोपनीयता
विभाग ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा है, 'आईडीएस 30 सितंबर, 2016 को बंद हो रहा है, जल्दी करें, अभी घोषणा करें।' विभाग ने कहा कि आयकर विभाग के इंटरनेट आधारित ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए ऐसी परिसंपत्ति का खुलासे करने की भी व्यवस्था की गई है, जिससे जानकारी देने वाली की गोपनीयता बनी रहेगी।
सीबीडीटी ने जारी किया छठा स्पष्टीकरण
सीबीडीटी ने आईडीएस पर छठा स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि 30 सितंबर को समाप्त हो रही चार महीने की योजना को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। आयकर विभाग की नीति निर्माता संस्था केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आय खुलासा योजना के बारे में विभिन्न प्रकार के सवालों के जवाब जारी किए हैं। ये जवाब कई किश्तों में जारी किए गए ताकि लोगों की शंका का समाधान किया जा सके।
किश्तों में कर सकते हैं भुगतान
सरकार ने इस योजना के तहत अघोषित संपत्तियों की घोषणा करने वालों की सुविधा के लिए टैक्स और जुर्माने के भुगतान की अवधि को बढ़ा दिया है। घोषित संपत्ति पर टैक्स और जुर्माने का भुगतान तीन किश्तों में किया जा सकेगा।
सितंबर 2017 है टैक्स जमा करने की डेडलाइन
घोषित संपत्ति पर जो भी टैक्स और जुर्माना बनेगा, उसका 25 फीसदी नवंबर, 2016 में, अगली 25 फीसदी राशि का भुगतान 31 मार्च, 2017 तक और शेष बची राशि का भुगतान 30 सितंबर, 2017 तक किया जा सकता है। इससे पहले पूरी राशि का भुगतान 30 नवंबर, 2016 तक किया जाना था।


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