केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार नई दिल्ली में आयोजित एक सेमिनार में GST समेत सरकारी बैंको के विलय और बैंको के निजीकरण पर अपनी खुलकर अपनी राय रखी। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने साफ किया कि कुछ सरकारी बैंको का विलय किया जा रहा है लेकिन उन्हें निजी हाथों में सौंपने की कोई योजना नहीं है।

लागू करने के मूड में सरकार
वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार के पास समय कम है फिर भी वह देश में जल्द से जल्द वस्तु एवं सेवा कर लागू करने के मूड में है।
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बैंको का निजीकरण नहीं : जेटली
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने नई दिल्ली में आयोजित अर्थशास्त्री भारत शिखर सम्मेलन में कहा, "मैं नहीं समझता हूं कि आम लोगों की राय और राजनीतिक विचार इस मुकाम पर पहुंचे हैं कि हम बैंकिंग क्षेत्र के निजीकरण के बारे में सोच सकते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का स्वास्थ्य सरकार की पहली प्राथमिकता है।"
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सरकार कर रही है सकारात्म पहल : जेटली
बैंकिंग क्षेत्रों द्वारा डूब रहे ऋणों की खोज के बारे में उन्होंने कहा कि अधिकांश ऋण क्षेत्रों को हुए नुकसान के कारण फंसे हैं। उन्होंने कहा, "सरकार पहले ही कई तरह के कदम उठा चुकी है। हमने कपड़ा, रियल एस्टेट, विद्युत इत्यादि क्षेत्रों में सुधारों के पैकेज की घोषणा की है, कार्य प्रगति में है।"
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GST के दूरगामी परिणाम आएंगे : जेटली
वस्तु एवं सेवा कर (GST) पर उन्होंने कहा कि देश की कर व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए यह दीर्घकालिक भूमिका निभाने जा रहा है। उन्होंने कहा, "एक बार जब इसका कार्यान्वयन शुरू हो जाएगा, पूरा देश एक बाजार बन जाएगा। यह दीर्घकालिक तौर पर कर की दर में स्थिरता लाएगा और यहां तक कि उसमें कमी भी लाएगा।"
देश के लोग GST के पक्ष में : जेटली
जेटली ने कहा, "GST सुधार के पक्ष में पूरा देश है। हमने इसके कार्यान्वयन के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया है। GST लागू करने के लिए हम समय के विपरीत चल रहे हैं।" जेटली ने कहा कि GST अप्रत्यक्ष कराधान में एक बड़ा सुधार है, जो काफी समय से लंबित है। वित्त मंत्री ने कहा, "लोग GST के पक्ष में हैं। हमने इसे लागू करने का मुश्किल लक्ष्य तय किया है।"


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