भारत को हर वक्त आंख दिखाने वाला पाकिस्तान आए दिन युद्ध की धमकी देता रहता है। आपको बता दें कि आर्थिक रुप से मजबूत देश भी युद्ध से बचना चाहता है, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ये है कि युद्ध आर्थिक रुप से किसी भी देश की दशा खराब कर देता है। ये असर युद्ध करने वाले हर देश पर पड़ता है। अब रही बात पाकिस्तान की तो सभी जानते हैं कि पाकिस्तान आर्थिक रुप से कितना बदहाल है।
हर मोर्चे पर भारत से पीछे है पाकिस्तान
पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां निवेश की संभावनाएं सबसे कम है। आतंकवाद और भ्रष्टाचार की गहराई में डूबा पाकिस्तान खुद को आने वाले दशक में एक आर्थिक महाशक्ति मानता है, आइए देखें उसकी इस बात में कितना दम है।
जीडीपी
पाकिस्तान की मौजूदा जीडीपी की यदि बात करें तो वह वर्तमान में दुनिया की 41वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। पाकिस्तान की कुल जीडीपी 270 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। वहीं भारत दुनिया की 8वीं सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थ व्यवस्था है जबकि चीन दूसरे नंबर पर है।
विकास दर
पूरी दुनिया ये मान कर चल रही है कि आने वाला दशक भारत और चीन का होगा। दुनिया में एशियाई देशों का प्रभाव होगा। इसमें भारत, जापान, चीन, सिंगापुर, थाईलैंड जैसे देश हैं इसी फेहरिस्त में पाकिस्तान ने भी खुद को शामिल कर लिया है। जबकि सच्चाई ये है कि पाकिस्तान की विकास दर कई एशियाई देशों से नीचे है। वर्तमान में पाकिस्तान की विकासदर 5.54 फीसदी है। जबकि भारत की विकास दर 7.57 फीसदी है वहीं चीन भारत से पीछे है चीन की विकास दर 6.9 है।
प्रति व्यक्ति आय
प्रति व्यक्ति आय के मामले में पाकिस्तान की स्थिति थोड़ी बेहतर है। हालांकि पाकिस्तान की जनसंख्या भारत के मुकाबले बहुत कम है इसलिए प्रतिव्यक्ति आय का आंकड़ा भारत के प्रति व्यक्ति आय के आस-पास है। वर्तमान में पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय 1428.99 डॉलर है जबकि भारत की प्रति व्यक्ति आय 1581.59 डॉलर है वहीं चीन की प्रतिव्यक्ति आय 7924.65 डॉलर है।
बेरोजगारी
पाकिस्तान में बेरोजगारी एक बड़ा संकट है। पाकिस्तान में बहुत कम निवेश के कारण वहां बेरोजगारी बढ़ी है। पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था इस वक्त CPEC यानि चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर टिकी है। पाकिस्तान की वर्तमान बेरोगारी की दर 5.2 फीसदी है। भारत की वर्तमान बेरोजगारी की दर 3.6 फीसदी और चीन की 4.7 फीसदी है।
एक डॉलर की कीमत
पाकिस्तान की करेंसी की हालत भी कुछ अच्छी नहीं है। पाकिस्तानी रुपया एक कमजोर अर्थव्यवस्था की कमजोर रकम है। वर्तमान में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 104.61 रुपए है जबकि भारत में यही आंकड़ा गिरकर 66.73 रुपए पर आ जाता है और चीन में 6.63 युआन रह जाता है।
गरीबी
गरीबी भारत और पाकिस्तान दोनों की बड़ी समस्या है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान से अपील की थी कि वह भारत से लड़ने के बजाय गरीबी से लड़े जिसमें भारत भी उसकी पूरी मदद करेगा लेकिन ये बात पाकिस्तान के पल्ले नहीं पड़ी। पाकिस्तान की 29.5 फीसदी जनसंख्या इस वक्त गरीबी रेखा से नीचे गुजारा कर रही है वहीं भारत में यह आंकड़ा 21.9 फीसदी है। चीन की सरकार ने इस संबंध में किसी तरह का आंकड़ा नहीं जारी किया है।
साक्षरता
शिक्षा के मामले में भी पाकिस्तान की हालत किसी अफ्रीकी देश जैसी ही है। पाकिस्तान में 56.76 फीसदी लोग साक्षर हैं जबकि भारत में सरकारी आंकड़े के मुताबकि साक्षरता दर 75 फीसदी से अधिक है। वहीं चीन में साक्षरता दर 95 फीसदी से अधिक है।
सैन्य खर्च
इस मामले में पाकिस्तान सबसे ज्यादा खर्च करता है। सैन्य साजो सामान पर पाकिस्तान के खर्च ने उसे दुनिया के 5 सबसे बड़े हथियार खरीदने वाले देशों में खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान अपना रक्षा बजट भी भारी भरकम रखता है। पाकिस्तान का कुल सैन्य खर्च उसकी जीडीपी का 3.57 प्रतिशत है जबकि भारत में यह आंकड़ा घटकर 2.42 फीसदी है और चीन में घटकर 1.98 फीसदी रह जाता है।


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