
कंपनी का ग्रॉस प्रीमियम 2012-13 में 1316 करोड़ था, जबकि 2013-14 में बढ़कर 1681 करोड़ हो गया।
डा. नंदगोपाल ने कहा कि कंपनी का मकसद बाजार की परिस्थितियों के अनुसार ही उपभोक्ताओं को बीमा का लाभ पहुंचायें। अगले वित्तीय वर्ष में कंपनी का फोकस उपभोक्ताओं के और करीब जाना होगा, ताकि उनकी जरूरतों के मुताबिक उन्हें ऑफर प्रदान किये जा सकें। नये उपभोक्ताओं को जोड़ने के लिये उन्हीं के हिसाब से योजनाएं लाने की तैयारी है।
वर्तमान में कंपनी स्वास्थ्य, सुरक्षा, बचत एवं संपत्ति के सेगमेंट में बीमा प्रदान कर रही है। आगले वित्तीय वर्ष में पेंशन एवं माइक्रो सेगमेंट के प्लान लेकर आने का प्लान है। डा. नंदगोपाल ने कहा कि कंपनी की योजनाओं को लचीला बनाया जायेगा, ताकि उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुसार उसमें परिवर्तन किये जा सकें और उपभोक्ताओं को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सकें।
इंडिया फर्स्ट बैंकाश्योरेंस को और ज्यादा विकसित कर रहा है, ताकि कॉर्पोरेट बिजनेस को बढ़ाया जा सके। इंडिया फर्स्ट अपनी तकनीक के मामले में हमेशा आगे रही है। इसके लिये 2013 में कंपनी को इंडिया इंश्योरेंस अवार्ड्स में मैजिक बोर्ड का पुरस्कार दिया गया था।
इंडिया फर्स्ट देश के 1000 से ज्यादा शहरों में है और करीब 8000 बैंक पार्टनर हैं। बैंकों में बैंक ऑफ बड़ौदा और आंध्रा बैंक प्रमुख हैं।


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