
बिजली तथा पूंजीगत सामान बनाने वाली कंपनियों समेत सभी क्षेत्रवार सूचकांक नकारात्मक दायरे में रहे। नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी भी 27.65 अंक या 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,040.70 अंक पर खुला। कारोबारियों ने कहा कि वैश्विक बाजार में कमजोर रूख के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा बाजार से पैसा निकाले जाने से बाजार धारणा पर असर पड़ा।
एसएंडपी ने दी थी चेतावनी
स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) की चेतावनी के बाद बंबई शेयर बाजार ने कल सोमवार को शुरुआती बढ़त गंवा दी और इसका संवेदी सूचकांक 51 अंक के नुकसान पर बंद हुआ। एसएंडपी ने आगाह किया है कि ब्रिक देशों में भारत संभवत: निवेश ग्रेड रेटिंग गंवाने वाला पहला राष्ट्र बन जाएगा। इससे शुरुआत में 175 अंक चढ़ने वाला सैंसेक्स अंत में नुकसान के साथ बंद हुआ।
पिछले पांच सत्रों में 754 अंक की बढ़त दर्ज करने वाला सैंसेक्स शुरुआती कारोबार में 174.94 अंक की बढ़त के साथ 16,893.81 अंक पर पहुंच गया। इस बीच, एसएंडपी की एक रपट में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर मंे गिरावट और आर्थिक नीतियों के निर्माण में राजनीतिक अड़चनों को देश की अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया। इससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई और अंत में सेंसेक्स 50.86 अंक की गिरावट के साथ 16,668.01 अंक पर बंद हुआ।
इसी के अनुरूप नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी 14.25 अंक या 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,054.10 अंक पर आ गया। एक समय इसने दिन का उच्चस्तर 5,124.45 अंक भी छुआ। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी और मारुति जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर नुकसान के साथ बंद हुए।
ब्रोकरों ने कहा कि वैश्विक शेयर बाजारों में बेहतर रुख तथा वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के इस आश्वासन कि अगले वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर में सुधार होगा, ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचा लिया। इसी सप्ताह आने वाले अप्रैल माह के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों तथा मई के महंगाई के आंकड़ों की वजह से भी बाजार में सतर्कता का रुख रहा। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की समीक्षा 18 जून को आनी है, इसका भी कहीं न कहीं बाजार पर असर दिखाई दिया।


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