नई दिल्ली, अगस्त 13। देश को आजाद हुए 75 साल पूरे होने जा रहे हैं। इसी मौके को खास बनाने के लिए पूरे देश में 'आजादी का अमृत महोत्सव' चल रहा है। साथ ही साथ हर घर तिरंगा अभियान भी पूरे जोरों पर है। इस अभियान का लक्ष्य 20 करोड़ घरों पर तिरंगा लहराने का है। इन 75 सालों में भारत ने कई ऊंचाइयां और नये मुकाम हासिल किए हैं। ये मुकाम हर क्षेत्र में हासिल किए गए हैं। आर्थिक तौर पर भी भारत एक मजबूत अर्थव्यवस्था बन कर उभरा है। यही वजह है कि ब्लूमबर्ग और देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में भारत को मंदी के खतरे से सुरक्षित बताया गया है। जहां एक और भारत ने 75 सालों में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं, वहीं चीजों के दाम भी जमीन से आसमान पर पहुंचे। इनमें दूध, चावल और गोल्ड शामिल हैं। आइए जानते हैं कि इन चीजों के रेट कहां से कहां पहुंच गये हैं।
चीन से तेज रफ्तार
75 वर्षों में भारत ने तरक्की की नई कहानी लिखी है। देश 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने की राह पर है। भारत तेजी से आर्थिक विकास कर रहा है। भारत ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन को भी तेजी के मामले में पछाड़ते हुए तेज रफ्तार से आर्थिक विकास करने वाले देश का खिताब हासिल कर लिया है।
एशिया का किंग बनेगा भारत
हाल ही में मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया गया है कि 2022-23 में भारत एशिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बन कर उभर सकता है। इन तमाम कामयाबियों के बीच आपका जानना जरूरी है कि इस दौरान जरूरी चीजों की कीमतें से कहां से पहुंच गयीं। आगे जानिए इसकी पूरी डिटेल।
जमीन से आसमान पर पहुंचे रेट
1947 में चावल का रेट 12 पैसे प्रति किलो था, जो अब 40 रुपये प्रति किलो है। तब चीनी 40 पैसे प्रति किलो थी, जो अब 42 रुपये प्रति किलो है। आलू 25 पैसे प्रति किलो था जो अब 25 रुपये प्रति किलो है। दूध (फुल क्रीम) 12 पैसे प्रति लीटर बिकता था जो अब 60 रुपये प्रति लीटर बिकता है। इसी तरह पेट्रोल 25 पैसे प्रति लीटर था, जो अब 97 रुपये प्रति लीटर हो गया है। साइकिल का दाम 20 रुपये था, जो अब 8000 रुपये है। फ्लाइट का किराया (दिल्ली से मुंबई) 140 रुपये था, जो अब करीब 7000 रुपये है। इसी तरह 10 ग्राम सोना 88.62 रु से उछल कर 52000 रु पर पहुंच गया है।
एक पैसा भी था अहम
1947 में एक-दो पैसे का भी बहुत महत्व था। एक रुपये में आप ढेर सारी चीजें खरीद सकते थे। रोजमर्रा की अधिकर चीजें चंद पैसों या रु में आ जाती थीं। मगर समय के साथ महंगाई बढ़ती गयी और चीजों के दाम सैकड़ों-हजारों में पहुंच गए।
जुलाई में घटी महंगाई
इस बीच खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में घटकर पांच महीने के निचले स्तर 6.71% पर आ गई, जिससे राजकोषीय और मौद्रिक अधिकारियों को राहत मिली क्योंकि वे मुद्रास्फीति से निपटने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे।


Click it and Unblock the Notifications