15 August 1947 में जब देश आजाद हुआ। तब देश की जीडीपी महज 2.7 लाख करोड़ रुपये थी। जीडीपी का यह आंकड़ा दुनिया की जीडीपी का 3 प्रतिशत था लेकिन देश ने इन सभी चुनौतियों का सामना किया और फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में जीडीपी 272 लाख करोड़ रुपये से अधिक पर पहुंच गई लेकिन इस दौरान देश को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा। जिसने देश की अर्थव्यवस्था को सीधी चोट की।

भारत ने सबसे भयानक सुखा भी देखा
आजाद भारत के लिए वर्ष 1960 का दशक काफी खराब रहा था। इस समय देश को भयानक सूखे से गुजरना पड़ा था। जिस वजह से अनाज खाने की आपूर्ति काफी बुरी तरह से बाधित हो गई थी।
इस अकाल के कारण भारत में लाखों लोग गुजर गए थे। ये वो दौर था जब हरित क्रांति अस्तित्व में आई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश इस विकराल समस्या से न केवल उबरा, बल्कि देश आज दुनिया को खाद्यान्न मुहैया कराने में भी सक्षम है।
एक बड़ी समस्या बना राजकोषीय घाटा
सूखे के बाद एक और सबसे बड़ी परेशानी का भारतीय अर्थव्यवस्था को सामना करना पड़ा। वह समय राजकोषीय घाटे की समस्या था। सूखे के बाद सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ने लगा। वही, देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब खत्म होने की कगार में पहुंच गया था।
यह वर्ष 1980-81 में जीडीपी के 9 प्रतिशत से बढ़कर 1985-86 में 10.4 फीसदी हो गया। इसके बाद ये बढ़ता गया और वर्ष 1990-91 में 12.7 प्रतिशत हो गया। देश का विदेशी कार्य करीब 2 गुना हो चुका था और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1 अरब डॉलर से भी कम रह गया था।
उस समय अन्तर्राष्ट्रीय मौद्रिक कोष (आईएमएफ) से लोन लेने के लिए 67 टन सोना गिरवी रखना पड़ा था लेकिन आज भारत इस समस्या से भी उभर आया और देश का विदेशी मुद्रा भंडार 601.45 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है।
इसके बाद देश ने 2008-09 के दौरान आर्थिक मंदी, 2016 के दौरान नोटबंदी, वर्ष 2020 में आए कोरोना महामारी जैसी समस्याओं का सामना करा। लेकिन, देश न केवल इन समस्याओं से उभरा बल्कि और सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनकर उभरा। देश की मिसाल वर्ल्ड बैंक सहित कई सारे देशों ने भी दी।


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