Vande Bharat Train: वंदे भारत ट्रेन की सीटें जा रही खाली, पैसेंजर्स को नहीं भा रही ये बात

Vande Bharat Train News: भारतीय रेल का नेटवर्क पूरे देश में बहुत बड़े स्तर पर फैला हुआ है। जिसमें एक्सप्रेस, राजधानी, शताब्दी के साथ वंदे भारत जैसी ट्रेने पटरी पर दौड़ रही है। भारत सरकर द्वारा हर प्रदेश को नई नई वंदे भारत की सौगात दी जा रही है।

इन दिनों अगर गौर करें तो देश के सभी हिस्सों में तो सबसे ज्यादा मांग केरल रूट की वंदे भारत ट्रेनों में देखने को मिलता है, वहीं बाकी अन्य रूटों की मांग कम है।

Vande Bharat

खास तौर से तिरुवनंतपुरम-कासरगोड और मंगलुरु-तिरुवनंतपुरम वंदे भारत ट्रेनें जिनमें से प्रत्येक में 16 कोच हैं, पूरी तरह से भरी हुई हैं। तिरुवनंतपुरम-कासरगोड ट्रेन में सभी 1016 सीटें भरी हुई हैं, जबकि मंगलुरु-तिरुवनंतपुरम सेवा में 474 सीटें पूरी तरह से भरी हुई हैं। यह भारी मांग दूसरे रूटों से बिल्कुल अलग है, जहां काफी संख्या में सीटें खाली रह जाती हैं।

कुछ रास्तों पर चुनौतियां और दाम तय करने का प्रभाव

केरल में दो सहित 17 ट्रेनें अधिकतम क्षमता पर चल रही हैं, लेकिन कुछ रास्तों पर यात्रियों की संख्या में गिरावट देखी गई है।

उदाहरण के लिए मंगलुरु-गोवा वंदे भारत एक्सप्रेस में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जहां इसकी 474 सीटों में से 300 तक खाली थीं, जिससे यात्रियों की पूरी तरह से भर पाना एक चुनौती बन गई है, इसकी एक वजह ये भी मानी जा रही है कोंकण मार्ग पर लगाया जाने वाला अधिक किराया है, जो कई यात्रियों को चिंता में डाल देता है।

वंदे भारत विश्लेषण में यह स्पष्ट है कि 59 ट्रेनें चल रही हैं, जिनमें से 18 16 कोचों के साथ चल रही हैं। कई ट्रेनों के अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उनमें से काफी संख्या में अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पा रही हैं। उदाहरण के लिए नागपुर-सिकंदराबाद वंदे भारत जो 20 कोचों के साथ चलती है, में नियमित रूप से 1328 सीटों में से 1118 खाली रहती हैं। इससे पता चलता है कि जहां कुछ रास्तों पर यात्रियों की मांग ज्यादा है, वहीं अन्य को यात्रियों को आकर्षित करने में काफी मेहनत करनी पड़ रही है।

वंदे भारत ट्रेनों के वितरण के लिए रेलवे के नजरिए से कम यूज का मुद्दा और भी कठिन हो गया है। इन एक्सप्रेस ट्रेनों को विशेष रास्तों वास्तविक घनत्व और मांग के बजाय क्षेत्रीय जरूरतों के आधार पर आवंटित करने के निर्णय को उनकी सफलता को प्रभावित करने वाले कारक के रूप में पहचाना गया है। इस रणनीति के कारण ऐसे परिदृश्य सामने आए हैं जहां कुछ ट्रेनें पूरी तरह से भरी हुई नहीं हैं, जो सेवा प्रावधान और यात्री मांग के बीच बेमेल को दिखाता है।

जबकि वंदे भारत एक्सप्रेस भारत के कुछ हिस्सों खासकर केरल में यात्रियों के बीच एक पसंदीदा विकल्प बन गई है, लेकिन पूरे देश में तस्वीर एक समान रूप से अच्छी नहीं है। कीमतों और रास्ता चुनना जैसे कारकों से प्रभावित यात्रियों की बदलती संख्या इस प्रमुख ट्रेन सेवा के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करती है। इन मुद्दों को संबोधित करना वंदे भारत एक्सप्रेस के पूरे नेटवर्क में इसकी क्षमता को अधिकतम करने में महत्वपूर्ण होगा।

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