10 सरकारी कंपनियां होंगी प्राइवेट, जानिए किन कंपनियों का लग सकता है नंबर

नई दिल्ली, जून 6। केंद्र सरकार 10 सरकारी कंपनियों को प्राइवेट कर सकती है। केंद्र सरकार 10 सरकारी कंपनियों (पीएसयू) में विनिवेश कर सकती है। इसके लिए या तो निजीकरण का सहारा लिया जाएगा या फिर ऑफर-फॉर-सेल (ओएफएस) का। संभावना है कि नेवेली लिग्नाइट, केआईओसीएल, एसजेवीएन, हुडको, एमएमटीसी, जनरल इंश्योरेंस ऑफ इंडिया और न्यू इंडिया एश्योरेंस सहित सात सार्वजनिक कंपनियों के नाम पर चर्चा हुई है। इन कंपनियो में विनिवेश के लिए निजीकरण या ओएफएस रूट का सहारा लिया जा सकता है।

जानिए बाकी कंपनियों की डिटेल

जानिए बाकी कंपनियों की डिटेल

इसके अलावा तीन और सरकारी कंपनियों में इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्प, रेल विकास निगम और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स शामिल हैं। इन कंपनियों को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों के तहत बाजार में उतारा जा सकता है। वित्त वर्ष 22-24 के बीच इन तीनों कंपनियों के लिए एक ओएफएस लाए जाने की संभावना है। सेबी के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंडों के तहत 19 सरकारी कंपनियों को अभी नियम के दायरे में लाना बाकी है। लिस्टेड कंपनियों को सेबी के मानदंडों के अनुसार कम से कम 25 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी रखनी जरूरी है।

तेजी से हो रही कार्यवाही

तेजी से हो रही कार्यवाही

सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार कैबिनेट सचिव ने रणनीतिक विनिवेश पर क्विक टाइमलाइन्स और फॉलो-अप की मांग की है। दीपम (निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग) और नीति आयोग को सरकारी कंपनियों के लिए नयी नीति के अनुसार रोडमैप तैयार करने का काम सौंपा गया है।

कब हुआ था नयी पॉलिसी का ऐलान

कब हुआ था नयी पॉलिसी का ऐलान

नई पीएसई (पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज) पॉलिसी को सरकार की तरफ से 4 फरवरी, 2021 को अधिसूचित किया गया था। सरकार ने नई पीएसई नीति के तहत पीएसयू के लिए रणनीतिक और गैर-रणनीतिक सेक्टरों को क्लासिफाइड किया गया है। रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार न्यूनतम सार्वजनिक उपक्रमों में नियंत्रण बनाए रखेगी और बाकी उद्यमों का निजीकरण/विलय या बंद कर देगी। गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में, यह निजीकरण या बंद करने पर विचार करेगी।

कितना है विनिवेश टार्गेट

कितना है विनिवेश टार्गेट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल केंद्रीय बजट में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य की घोषणा की, जिसमें ज्यादातर निजीकरण और रणनीतिक विनिवेश शामिल हैं। यहलक्ष्य महत्वाकांक्षी है क्योंकि वित्त वर्ष 2020-21 में महामारी के कारण 2.1 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।

कम करना पड़ा टार्गेट

कम करना पड़ा टार्गेट

वित्त वर्ष 2020-21 के शुरुआती पांच महीनों में महामारी के कारण विनिवेश लक्ष्य पूरी तरह से ठप रहा, जिससे केंद्र को अपना लक्ष्य 32000 करोड़ रुपये तक कम करना पड़ा था। पिछले वित्त वर्ष का सबसे बड़ा विनिवेश टाटा कम्युनिकेशंस लिमिटेड (टीसीएल) रहा। इसमें सरकार ने 26.12 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच कर 8,847 करोड़ रुपये प्राप्त किए।

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